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राजस्थान में डिग्री घोटाला
राजस्थान में डिग्री घोटाला

डिग्री घोटाला : राजस्थान में योग और पत्रकारिता पढ़े छात्रों को थमा दी वकालत की डिग्री

सीकर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में बड़ी लापरवाही सामने आई है। योग और पत्रकारिता के छात्रों को गलती से कानून (लॉ) की डिग्री दे दी गई। इस चूक ने सैकड़ों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
06 May 2026, 11:54 AM
नई दिल्ली/सीकर

राजस्थान के सीकर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय एक ऐसे विवाद में घिर गया है, जिसने उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां योग विज्ञान और पत्रकारिता जैसे विषयों की पढ़ाई करने वाले छात्रों को गलती से कानून (लॉ) की डिग्री थमा दी गई।

तीन साल तक योग के आसनों और पत्रकारिता की बारीकियों में मेहनत करने वाले छात्र जब अपनी डिग्री लेने पहुंचे, तो उनके चेहरे पर खुशी की जगह हैरानी और चिंता साफ नजर आई। डिग्री पर उनके विषय की जगह विधि विभाग Department of Law लिखा हुआ था। यानी जो छात्र योग प्रशिक्षक या पत्रकार बनने की तैयारी कर रहे थे, उन्हें कागजों में ‘वकील’ बना दिया गया।

यह मामला तब सामने आया जब विश्वविद्यालय ने हाल ही में दीक्षांत समारोह और डिग्री वितरण प्रक्रिया शुरू की। योग विज्ञान और पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्रों ने जैसे ही अपनी डिग्रियां खोलीं, उनमें विषय की गलत छपाई देखकर वे स्तब्ध रह गए।

छात्रों के मुताबिक, यह कोई मामूली टाइपिंग मिस्टेक नहीं, विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में गंभीर खामी का संकेत है। सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में डिग्रियों की प्रिंटिंग और सत्यापन के दौरान यह गलती कैसे नजरअंदाज हो गई। मामले की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और अपनी गलती स्वीकार की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी प्रभावित छात्रों को सही डिग्रियां जारी की जाएंगी।

हालांकि, इस घटना ने छात्रों के मन में असुरक्षा और अविश्वास की भावना जरूर पैदा कर दी है। नौकरी, आगे की पढ़ाई और दस्तावेज़ सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में इस तरह की चूक छात्रों के करियर पर सीधा असर डाल सकती है।

यह घटना सिर्फ एक विश्वविद्यालय की गलती नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है कि प्रशासनिक लापरवाही किस तरह छात्रों के भविष्य को संकट में डाल सकती है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय अपनी साख बचाने के लिए कितनी तेजी और पारदर्शिता से सुधारात्मक कदम उठाता है।

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