एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड की सामाजिक दायित्व (सीएसआर) योजना एवं भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), जबलपुर के संयुक्त प्रयास से बागबाहरा जनपद पंचायत के सभागार में 29 अप्रैल 2026 को दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण प्रदान करने हेतु मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति
शिविर में जनपद पंचायत बागबाहरा के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष केशव नायक राम चंद्राकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. मण्डावी, उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार जनपद सदस्य राहुल चंद्राकर, भूपेन दीवान विकास विस्तार अधिकारी जी.आर. बरिहा, जनपद सदस्य प्रतिनिधि केशव चंद्राकर, सरपंच सेवाराम साहू एवं मुबारक खान सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। समाज कल्याण विभाग महासमुंद से सुनिता टिर्की, अमित सक्सेना, गौतम यादव तथा समाज शिक्षा संगठक मानसिंह बरिहा ने भी शिविर में अपनी सहभागिता दी।
अध्यक्ष का संबोधन एवं संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद अध्यक्ष श्री चंद्राकर ने कहा कि दिव्यांगजनों के कल्याण और उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए ऐसे शिविर समय-समय पर आयोजित किए जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनपद पंचायत भविष्य में भी दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकतानुसार सहायक उपकरण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।
साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उपस्थित नागरिकों को “नशामुक्त भारत अभियान” के तहत शपथ दिलाई और समाज को जागरूक करने का आह्वान किया। उपाध्यक्ष तरुण व्यवहार ने भी कहा दिव्यांगजनों का सेवा सच्ची सेवा है और हमारे जनपद क्षेत्र में जितने भी दिव्यांगजन है उनको चिन्हाकित कर उचित उपकरण दिलाया जाएगा
लाभार्थियों का परीक्षण एवं चयन
शिविर के दौरान कुल 32 दिव्यांगजनों ने आवेदन प्रस्तुत किए, जिनमें से एलिम्को की विशेषज्ञ टीम द्वारा 26 हितग्राहियों का विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरणों—जैसे कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र आदि—के लिए परीक्षण एवं चिन्हांकन किया गया। चयनित हितग्राहियों को आगामी चरण में निःशुल्क उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके दैनिक जीवन में सुगमता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
यह शिविर न केवल दिव्यांगजनों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक सार्थक कदम है, बल्कि समाज में समावेशिता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने का भी एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
