जिला पुलिस और खाद्य विभाग की सतर्कता से एलपीजी गैस की कालाबाजारी और आपराधिक न्यास भंग (Criminal Breach of Trust) का एक बड़ा मामला सामने आया है। थाना सिंघोड़ा क्षेत्र में जब्त किए गए 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों से करीब 87 टन गैस चोरी करने के आरोप में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालकों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी निखिल वैष्णव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और अन्य फिलहाल फरार हैं।
क्या है पूरा मामला? सुरक्षा के नाम पर रची गई साजिश
दिसंबर 2025 में थाना सिंघोड़ा पुलिस ने अपराध क्रमांक 96/25 के तहत 06 नग एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों (CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663, CG 07 CX 7472, KA 01 AH 4318, CG 12 BS 4295) को जब्त किया था। भीषण गर्मी और थाने में सुरक्षा संसाधनों की कमी को देखते हुए, इन ट्रकों में विस्फोट या किसी दुर्घटना की आशंका जताई गई थी।
पुलिस अधीक्षक महासमुन्द की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर ने इन ट्रकों को किसी सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश खाद्य विभाग को दिए। इसी आदेश के परिपालन में 30 मार्च 2026 को खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे और खाद्य अधिकारी हरीश सोनेश्वरी की उपस्थिति में इन ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स (उरला, अभनपुर) के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को 'सुपुर्दनामा' (Safe Custody) पर सौंपा गया।
सुपुर्दनामा मिलते ही शुरू हुआ 'गैस चोरी' का खेल
जांच में खुलासा हुआ कि संतोष सिंह ठाकुर ने ट्रकों को सुरक्षित रखने के बजाय, उन्हें खाली करने की साजिश रची। 31 मार्च 2026 की रात से ही गैस चोरी का सिलसिला शुरू हो गया:
31 मार्च 2026: रात 7 से 12 बजे के बीच दो कैप्सूल खाली किए गए।
1 अप्रैल से 5 अप्रैल: अन्य चार कैप्सूलों को भी बारी-बारी से आपराधिक षडयंत्र के तहत खाली कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि सिंघोड़ा से अभनपुर के 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से अधिक धर्मकांटा (Weight Bridge) होने के बावजूद, आरोपियों ने जानबूझकर ट्रकों का वजन नहीं कराया ताकि गैस की मात्रा का सटीक रिकॉर्ड न रहे।
जांच में खुली पोल: 47 टन खरीदी और 107 टन बेच दी
पुलिस और खाद्य विभाग की तीन दिनों की गहन जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के दस्तावेजों के अनुसार, अप्रैल माह में कंपनी ने आधिकारिक रूप से केवल 47 टन गैस खरीदी थी, लेकिन कागजों में बिक्री 107 टन की दिखाई गई। यह अतिरिक्त 60 टन गैस वही थी, जो जब्तशुदा ट्रकों से चोरी की गई थी। इसके अलावा, भारी मात्रा में गैस बिना किसी बिल के 'कच्चे चालान' पर रायपुर की विभिन्न एजेंसियों को बेची गई।
साक्ष्य मिटाने की कोशिश और विशेषज्ञों की राय
जब मामले की जांच शुरू हुई, तो आरोपियों ने प्लांट के गेट पर रखे जाने वाले आवक-जावक रजिस्टर और अप्रैल माह के सेल रिकॉर्ड्स गायब कर दिए ताकि अवैध खरीदारों की पहचान न हो सके। आरोपियों ने बचाव में 'गैस लीकेज' का तर्क देने की कोशिश की, जिसे विशेषज्ञों ने सिरे से खारिज कर दिया। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के अनुसार, तीन महीने में किसी कैप्सूल से 20 टन गैस का रिसाव बिना किसी बड़े हादसे के होना नामुमकिन है।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई: भारी मात्रा में जप्ती
पुलिस ने उरला स्थित प्लांट पर दबिश देकर निम्नलिखित सामग्री जब्त की है:
07 नग एलपीजी कैप्सूल टैंकर।
04 नग गैस बुलेट (21 टन क्षमता) - कीमत ₹9.24 लाख।
125 नग विभिन्न क्षमता के कमर्शियल गैस सिलेंडर।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य: 04 सीपीयू, 02 सीसीटीवी डीवीआर और 01 मोबाइल।
दस्तावेज: लेनदेन से संबंधित कच्चे-पक्के चालान, रजिस्टर और फाइलें।
दर्ज धाराएं और गिरफ्तारी
महासमुन्द पुलिस ने आरोपी संतोष सिंह ठाकुर, सार्थक ठाकुर और अन्य के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(3), 3(5), 61, 238 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) की धारा 3, 7 और IT एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। अब तक एक आरोपी निखिल वैष्णव (उम्र 41 वर्ष, अभनपुर) को गिरफ्तार किया गया है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
इस कार्यवाही से गैस माफियाओं के बीच हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सुपुर्दगी में मिली संपत्ति के साथ धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
