जिले के कोमाखान क्षेत्र में धान खरीदी के नाम पर किसानों के साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया है। ग्राम बोईरगांव, लोन्दामुड़ा, नर्रा, कसेकेरा, देवरी सहित कई गांवों के किसानों ने जब अपनी पीड़ा कलेक्टर जनदर्शन में रखी, तो मामला सीधे जिला प्रशासन और पुलिस के संज्ञान में आया।
शिकायतों
की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन ने संयुक्त जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया व्यापारी गिरीश
कुमार पाड़े, योगेश पाड़े और रूपेश पाड़े द्वारा सुनियोजित
धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4),
3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
जानिए कैसे हुआ पूरा खेल-
किसानों
के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें बाजार मूल्य (1500–1550 रुपये
प्रति क्विंटल) से कहीं अधिक यानी 1800 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल देने का लालच दिया। अधिक दाम के लालच में किसानों ने
अपनी रबी फसल का धान बेच दिया, लेकिन भुगतान के नाम पर केवल
आश्वासन मिलता रहा। करीब 2 करोड़ रुपए की
राशि आज तक किसानों को नहीं मिली है, जिससे छोटे और मध्यम
किसान भारी आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
सरकारी नियमों की अनदेखी और अवैध खरीदी-
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धान खरीदी
के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित हैं, जिसके मुताबिक-
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धान खरीदी केवल पंजीकृत सहकारी समितियों एवं अधिकृत केंद्रों के माध्यम से
ही की जा सकती है।
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किसानों का पंजीयन अनिवार्य होता है और खरीदी समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाती है।
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खरीदी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज होती है और भुगतान सीधे
किसानों के बैंक खाते में किया जाता है।
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निजी व्यापारियों द्वारा इस तरह अनियमित और नकद आधारित खरीदी प्रतिबंधित मानी
जाती है।
इसके अलावा, अवैध धान परिवहन और तस्करी रोकने के लिए शासन ने सख्त प्रावधान बनाए हैं-
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बिना वैध दस्तावेज (टोकन,
पंजीयन) के धान का परिवहन अपराध है
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सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और उड़नदस्ता टीम तैनात रहती है
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संदिग्ध खरीदी या भंडारण पर जब्ती और एफआईआर की कार्रवाई होती है
इस मामले में आरोपियों द्वारा इन
नियमों को दरकिनार कर किसानों को लालच देकर धान खरीदना स्पष्ट रूप से नीतिगत
उल्लंघन और आपराधिक कृत्य माना जा रहा है।
जनदर्शन बना न्याय का मजबूत मंच-
यह मामला इस बात का उदाहरण बनकर
सामने आया है कि जनदर्शन एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, ग्रामीणों और पीड़ितों के लिए न्याय
पाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। कलेक्टर कार्यालय में सीधे शिकायत दर्ज होने
के बाद जिस तेजी से जांच और एफआईआर की कार्रवाई हुई, वह जिला
प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता को दर्शाता है।
किसानों की स्थिति: कर्ज और संकट
पीड़ित किसानों ने बताया कि
उन्होंने खेती के लिए खाद, बीज और दवाइयों के लिए कर्ज लिया था। भुगतान न मिलने के कारण अब वे कर्ज
चुकाने में असमर्थ हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर हो
गई है।
भारतीय न्याय संहिता के तहत सजा का प्रावधन है, जिसमें
धारा 318(4) धोखाधड़ी के लिए-
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अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास साथ में जुर्माना
धारा 3(5) सामूहिक अपराध के लिए-
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सभी आरोपियों को समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा
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मुख्य अपराध के अनुसार सजा लागू होगी
आगे की कार्रवाई
पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की संपत्ति और लेन-देन की भी जांच की जाएगी, ताकि किसानों की राशि की वसूली सुनिश्चित की जा सके।
