बिहार की राजधानी पटना में शिक्षक भर्ती के चौथे चरण (BPSC TRE 4.0) के विज्ञापन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद शहर की कई सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण रही। प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थियों के घायल होने की भी सूचना है, जबकि कुछ को गंभीर चोटें आईं।
पटना कॉलेज से शुरू हुआ पैदल मार्च, बीपीएससी कार्यालय की ओर बढ़े अभ्यर्थी
सुबह करीब 10 बजे बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी पटना कॉलेज के पास एकत्र हुए और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर पैदल मार्च शुरू किया। यह मार्च बीपीएससी कार्यालय की ओर जा रहा था। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। हालांकि, जैसे ही जुलूस आगे बढ़ा, पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की।
बैरिकेडिंग के बाद बढ़ा तनाव, पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
प्रदर्शनकारियों के न रुकने पर स्थिति बिगड़ने लगी और पुलिस व अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे कई अभ्यर्थी घायल हो गए। कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें गुंडों की तरह पीटा गया, जबकि वे केवल नौकरी की मांग कर रहे थे। इस दौरान एक महिला अभ्यर्थी के घायल होने और पैर कुचलने की भी तस्वीरें सामने आईं।
डाकबंगला चौराहा और ट्रैफिक व्यवस्था पर असर
प्रदर्शन के चलते डाकबंगला चौराहा और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ जमा हो गई। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के कारण पटना की ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और कई मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया था और वाटर कैनन तथा आंसू गैस की व्यवस्था भी की गई थी, हालांकि उपयोग लाठीचार्ज के बाद ही किया गया।
शिक्षक अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य तीन मांगें हैं। पहली मांग है कि सरकार जल्द से जल्द TRE 4 वैकेंसी का आधिकारिक विज्ञापन जारी करे। दूसरी मांग के तहत पदों की संख्या स्पष्ट करने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया की निश्चित समयसीमा (डेडलाइन) घोषित की जाए। तीसरी मांग में बिहार के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए डोमिसाइल नीति लागू करने की बात शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
