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सुशासन तिहार के बीच छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक बदलाव : 42 IAS अधिकारियों का तबादला, 8 जिलों के कलेक्टर बदले, शासन व्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी

छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 42 IAS अधिकारियों का तबादला किया है। इस बदलाव में 8 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। IAS विश्वदीप को बीजापुर का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं 1994 बैच की IAS ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव बनाते हुए अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
06 May 2026, 05:56 PM
रायपुर

छत्तीसगढ़ में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और व्यापक प्रशासनिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे सुशासन तिहार अभियान के बीच राज्य प्रशासन में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिला है। इस निर्णय के तहत कुल 42 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का तबादला किया गया है, जबकि 8 जिलों के कलेक्टरों को भी नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा भरने और विकास कार्यों की गति को तेज करने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राज्य सरकार सुशासन तिहार के माध्यम से जनता से सीधे संवाद और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दे रही है।

42 IAS अधिकारियों का तबादला

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभिन्न संवर्ग और वरिष्ठता स्तर के कुल 42 IAS अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया गया है। इस बड़े फेरबदल का उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाना बताया जा रहा है।

इस बदलाव में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के विभागों में भी महत्वपूर्ण पुनर्संयोजन किया गया है, जिससे नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र पर विशेष फोकस

इस तबादला सूची में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बीजापुर जिले को लेकर माना जा रहा है। यहां IAS अधिकारी विश्वदीप को नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है।

नक्सल प्रभावित इस जिले में प्रशासनिक मजबूती, सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है। सरकार की मंशा है कि संवेदनशील जिलों में अनुभवी और सक्रिय प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती से जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई दे।

पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में बड़ा बदलाव

1994 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी ऋचा शर्मा को अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में कार्यरत थीं।

इसके साथ ही उन्हें ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक और विकास आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

यह बदलाव ग्रामीण विकास योजनाओं, पंचायत सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का फोकस है कि अंतिम छोर तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

गृह और वन विभाग में अतिरिक्त जिम्मेदारी

इसी क्रम में IAS मनोज कुमार पिंगुआ, जो वर्तमान में गृह एवं जेल विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं, उन्हें अस्थायी रूप से वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

यह निर्णय प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अधिक समन्वित कार्य प्रणाली विकसित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। राज्य में वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की कवायद

IAS सुबोध कुमार सिंह के कार्यक्षेत्र में भी बड़ा विस्तार किया गया है। वे वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।

अब उन्हें प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग और राज्य की बिजली कंपनियों के अध्यक्ष का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है।

यह निर्णय राज्य में ऊर्जा क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन, बिजली वितरण प्रणाली की मजबूती और नीति स्तर पर समन्वय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि औद्योगिक और घरेलू दोनों क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो।

8 जिलों के कलेक्टर बदले

इस प्रशासनिक फेरबदल में 8 जिलों के कलेक्टरों का तबादला सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। बीजापुर सहित कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की गई है।

सरकार का मानना है कि नए कलेक्टरों की तैनाती से—

  • विकास योजनाओं में तेजी आएगी
  • कानून व्यवस्था और मजबूत होगी
  • जनहितकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा
  • प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी

जिलों में तैनात नए अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू करेंगे और जनता से सीधे संवाद स्थापित करेंगे।

सुशासन तिहार के बीच बड़ा प्रशासनिक संकेत

छत्तीसगढ़ में चल रहे सुशासन तिहार को सरकार एक व्यापक जनसंपर्क और सेवा सुधार अभियान के रूप में देख रही है। इसी के साथ प्रशासनिक फेरबदल को जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार शासन व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाना चाहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल पदस्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे शासन की कार्यशैली में सुधार और फील्ड लेवल पर परिणाम बढ़ाने की रणनीति है।

सुशासन तिहार के दौरान जनता से मिले फीडबैक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर ऐसे निर्णय लिए जाने की संभावना को और मजबूत माना जा रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश

राज्य सरकार का यह व्यापक फेरबदल स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि प्रशासनिक तंत्र को अधिक सक्रिय, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विभागीय स्तर पर किए गए ये बदलाव आने वाले समय में विकास कार्यों की गति को बढ़ा सकते हैं।

विशेषकर ग्रामीण विकास, ऊर्जा, वन एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए बदलावों से नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद की जा रही है।





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