प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों देशभर में अपने धार्मिक कार्यक्रमों चल रहे हैं। 4 मई 2026 को उनका वर्तमान प्रवास मुंबई में चल रहा है, जहां वे श्री बागेश्वर बालाजी सनातन मठ में श्रद्धालुओं को दर्शन और आशीर्वाद दे रहे हैं। सोमवार के दिन यहां विशेष रूप से बालाजी सरकार की आरती और दिव्य दर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी।
धार्मिक आस्था और श्रद्धा का केंद्र बने इन आयोजनों में भक्त अपने जीवन की समस्याओं और मनोकामनाओं को लेकर पहुंचते हैं। बागेश्वर धाम सरकार के दरबार की खास बात यह होती है कि यहां “अर्जी” के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान बताया जाता है, जिसे लेकर देश-विदेश से श्रद्धालु जुड़ते हैं।बागेश्वर धाम सरकार के इस धार्मिक
हर दिन अलग विषयों पर चर्चा
कार्यक्रम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा दिए जा रहे प्रवचनों का मूल केंद्र सनातन धर्म, भक्ति, और जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले संदेश रहे। हालांकि हर कथा की तरह इस कार्यक्रम में भी अलग-अलग दिन अलग विषयों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है, लेकिन अब तक के प्रवचनों में कुछ प्रमुख बातें उभरकर सामने आई हैं।
भाग दौड़ भरे जीवन में भक्तिभाव
सबसे पहले उन्होंने भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति को जीवन का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में मानसिक तनाव, भय और अस्थिरता से बचने के लिए हनुमान भक्ति और नाम स्मरण सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।
सनातन धर्म और संस्कृति
उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित रूप से राम नाम जप और हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी। अपने प्रवचन में उन्होंने सनातन धर्म की एकता और जागरूकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है और हर व्यक्ति को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। यह संदेश खासकर युवाओं को ध्यान में रखकर दिया गया।

परिवार और समाज
इसके अलावा उन्होंने परिवार और संस्कारों के महत्व को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि अगर परिवार मजबूत रहेगा तो समाज और राष्ट्र भी मजबूत होगा। माता-पिता का सम्मान, बुजुर्गों की सेवा और बच्चों को अच्छे संस्कार देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
कथा के दौरान उन्होंने कई बार सकारात्मक सोच और सकारात्मक पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली परेशानियों से घबराने के बजाय ईश्वर पर विश्वास रखकर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि हर समस्या का समाधान भक्ति और धैर्य में छिपा होता है।
सच्ची श्रद्धा अपनाने का संदेश
साथ ही, अपने प्रसिद्ध “दिव्य दरबार” से जुड़े संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि समस्या का समाधान केवल चमत्कार में नहीं, बल्कि विश्वास, कर्म और ईश्वर की कृपा में होता है। उन्होंने लोगों को अंधविश्वास से दूर रहकर सच्ची श्रद्धा अपनाने का संदेश दिया।
इस कथा में दिए गए प्रवचन भक्ति, संस्कार, सकारात्मकता और सनातन धर्म की जागरूकता, जो श्रद्धालुओं को न सिर्फ आध्यात्मिक शांति दे रहे हैं, बल्कि जीवन जीने की नई दिशा भी दिखा रहे हैं।
