एक समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिक जरूरतें रोटी, कपड़ा, मकान के साथ सड़क, पानी और बिजली तक सीमित थीं, लेकिन बदलते समय के साथ गांवों की सोच और अपेक्षाएं भी तेजी से बदल रही हैं। अब ग्रामीण सिर्फ बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहना चाहते, वे अपने गांवों में अत्याधुनिक संसाधनों और डिजिटल सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
पिथौरा क्षेत्र से महासमुंद जिला
पंचायत पहुंची सभापति रामदुलारी सिन्हा ने गांवों के बदलते परिदृश्य पर प्रकाश
डालते हुए बताया कि आज के ग्रामीण 5G मोबाइल नेटवर्क, च्वाइस
सेंटर और डिजिटल सेवाओं को अपनी प्राथमिक जरूरत मानने लगे हैं। उन्होंने कहा कि
पहले जहां गांवों में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए रंगमंच की आवश्यकता होती थी,
वहीं अब ग्रामीण थिएटर और आधुनिक मंच चाहते हैं, जहां स्थानीय प्रतिभाएं और यूट्यूबर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।
रामदुलारी सिन्हा ने अपने अनुभव
साझा करते हुए बताया कि वह पूर्व में सरपंच और जनपद अध्यक्ष रह चुकी हैं, और उन्होंने
गांवों में विकास की इस यात्रा को करीब से देखा है। उनके अनुसार, समय के साथ ग्रामीणों की सोच में व्यापक बदलाव आया है। अब शिक्षा के
क्षेत्र में भी ग्रामीण पीछे नहीं रहना चाहते। गांव-गांव में स्कूल तो खुल चुके
हैं, लेकिन अब लोग चाहते हैं कि इन स्कूलों को आधुनिक
सुविधाओं से लैस किया जाए। बच्चों को प्रोजेक्टर और डिजिटल माध्यमों से लाइव पढ़ाई
की सुविधा मिले, ताकि वे शहरों के छात्रों के बराबर
प्रतिस्पर्धा कर सकें।
इस दौरान पंचायत राज व्यवस्था और
केंद्र सरकार की ग्रामीण योजनाओं पर भी चर्चा हुई। कीर्तिमान के संस्थापक डॉ. नीरज
गजेंद्र के साथ हुई बातचीत में ग्रामीण विकास के नए आयामों पर विचार-विमर्श किया
गया। इस चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी पहुंच अब गांवों
के समग्र विकास का अहम हिस्सा बन चुकी है।
मौके पर मौजूद भाजपा नेता सीताराम सिन्हा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं गांवों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए उत्साहित हैं और इससे उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने गांवों की तस्वीर बदलने में अहम योगदान दिया है।