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कीर्तिमान कार्यालय में डॉ. नीरज गजेंद्र से चर्चा करते हुए दाऊलाल चंद्राकर और लक्ष्मीनाथ चंद्राकर।
कीर्तिमान कार्यालय में डॉ. नीरज गजेंद्र से चर्चा करते हुए दाऊलाल चंद्राकर और लक्ष्मीनाथ चंद्राकर।
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आस्था के केंद्रों को सशक्त बनाने में जुटा मंदिर महासंघ, संयोजक दाऊलाल ने पारदर्शिता, सुरक्षा और स्वायत्तता को बताया जरूरी

खल्लारी में हाल ही में हुई रोपवे दुर्घटना को उन्होंने दुखद बताया, लेकिन उससे भी अधिक चिंताजनक बात उनके अनुसार यह है कि दुर्घटना की जांच के नाम पर मंदिर ट्रस्टियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका तर्क बिल्कुल स्पष्ट है कि मंदिर ट्रस्ट का दायित्व मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं की व्यवस्था तक सीमित है, न कि किसी तकनीकी ढांचे जैसे रोपवे के रख-रखाव तक

डॉ. नीरज गजेंद्र
डॉ. नीरज गजेंद्र
11 Apr 2026, 04:17 PM
छत्तीसगढ़

धार्मिक स्थलों की पवित्रता और उनके संचालन की पारंपरिक व्यवस्था आज एक नए प्रकार के दबाव का सामना कर रही है। महासमुंद जिला मंदिर महासंघ के मुख्य संयोजक एवं गंधेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट, सिरपुर के प्रमुख दाऊलाल चंद्राकर की हालिया चिंताएं इस बदलते परिदृश्य की गंभीरता को स्पष्ट करती हैं। कीर्तिमान कार्यालय में पत्रकार डॉ. नीरज गजेंद्र से सौजन्य भेंट के दौरान उन्होंने जिस स्पष्टता से अपने विचार रखे। 

खल्लारी में हाल ही में हुई रोपवे दुर्घटना को उन्होंने दुखद बताया, लेकिन उससे भी अधिक चिंताजनक बात उनके अनुसार यह है कि दुर्घटना की जांच के नाम पर मंदिर ट्रस्टियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका तर्क बिल्कुल स्पष्ट है कि मंदिर ट्रस्ट का दायित्व मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं की व्यवस्था तक सीमित है, न कि किसी तकनीकी ढांचे जैसे रोपवे के रख-रखाव तक। यह प्रश्न प्रशासनिक जिम्मेदारी का ही नहीं,  जवाबदेही की सही परिभाषा तय करने का भी है।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर भी ध्यान दिलाया कि धार्मिक स्थलों में बढ़ता हुआ व्यावसायिक और राजनीतिक हस्तक्षेप व्यवस्था पर प्रतिकूल असर डालते हैं। यह हस्तक्षेप  मंदिरों की मूल भावना को प्रभावित करता है, और उनके संचालन की पारदर्शिता और संतुलन को भी बिगाड़ता है। ऐसे में आवश्यक है कि मंदिरों की स्वायत्तता और उनकी पारंपरिक संरचना को संरक्षित किया जाए। सकारात्मक पहलू यह है कि महासमुंद जिला मंदिर महासंघ इस चुनौती को  समस्या के रूप में नहीं, बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देख रहा है। जिले के मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और व्यवस्थाओं को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बागबाहरा के चंडी मंदिर और सराईपाली के अर्जुंडा धाम में आयोजित बैठकों में ट्रस्टियों और समिति संचालकों ने मिलकर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस विचार-विमर्श किया है।

इसके साथ ही मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व को सही ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां आस्था ही नहीं, अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भी समझ सकें। चर्चा में मीडिया जगत के लक्ष्मीनाथ चंद्राकर भी शामिल रहे।

 

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