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छिंद बीजों से कैफीन-फ्री हर्बल कॉफी तैयार
छिंद बीजों से कैफीन-फ्री हर्बल कॉफी तैयार
छत्तीसगढ़

बस्तर की नई वैश्विक पहचान : जंगल के छिंद बीजों से तैयार हुई कैफीन-फ्री हर्बल कॉफी, कचरे से कंचन की अनोखी मिसाल

दंतेवाड़ा के युवा उद्यमी विशाल हालदार ने बस्तर के जंगलों में बेकार माने जाने वाले छिंद (खजूर प्रजाति) के बीजों से कैफीन-फ्री हर्बल कॉफी विकसित कर अनोखा नवाचार किया है। यह कॉफी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर और स्वास्थ्यवर्धक है, जो अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और एसिडिटी के मरीजों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला है और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भी इसे सराहा है। यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि बस्तर में ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं भी खोल रहा है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
08 May 2026, 05:54 PM
📍 रायपुर/दंतेवाड़ा

बस्तर, जो अब तक अपनी घनी वनों, जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता था, अब एक नई पहचान गढ़ रहा है—“सुगंधित क्रांति” की पहचान। यहां जंगलों में बेकार फेंके जाने वाले छिंद (स्थानीय खजूर प्रजाति), पाम और अन्य बीजों से अब एक अनोखी हर्बल कॉफी तैयार की जा रही है, जो न सिर्फ कैफीन-फ्री है बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी है। इस नवाचार ने बस्तर को पर्यावरणीय नवाचार के वैश्विक नक्शे पर नई जगह दिलाई है।

इस अभिनव प्रयोग के पीछे हैं दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार, जिन्होंने “कचरे से कंचन” की अवधारणा को हकीकत में बदल दिया है।

दो साल की मेहनत से तैयार हुआ ‘हर्बल ब्रू’ का फॉर्मूला

बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई कर चुके विशाल हालदार ने करीब दो वर्षों तक रिसर्च कर इस हर्बल कॉफी का फॉर्मूला तैयार किया। बस्तर के जंगलों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले छिंद के बीज, जो अब तक अनुपयोगी माने जाते थे, उन्हें प्रोसेस कर एक विशेष तकनीक के जरिए रोस्ट किया जाता है और फिर उनसे कैफीन-फ्री कॉफी बनाई जाती है।

विशाल बताते हैं कि इस कॉफी में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स, फेनोलिक कंपाउंड्स और ओलिक एसिड पाए जाते हैं, जो इसे सामान्य कॉफी की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं।

यह कॉफी विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जिन्हें—

  • अनिद्रा की समस्या
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • एसिडिटी
  • कैफीन सेंसिटिविटी

स्वास्थ्य और स्वाद दोनों का संतुलन

इस हर्बल कॉफी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्वाद में कॉफी जैसी गहराई देती है, लेकिन इसमें कैफीन नहीं होता। यानी लोग बिना किसी साइड इफेक्ट के कॉफी का आनंद ले सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह उत्पाद “फंक्शनल बेवरेज” की श्रेणी में आता है, जो आने वाले समय में हेल्थ ड्रिंक्स मार्केट में बड़ी संभावनाएं रखता है।

मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

विशाल हालदार के इस नवाचार को जगदलपुर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला। इस उपलब्धि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें सम्मानित किया और इस प्रयास को “छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति का उदाहरण” बताया।

वहीं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित कई विशेषज्ञों और प्रबुद्धजनों ने इस हर्बल कॉफी के स्वाद, सुगंध और अवधारणा की खुलकर सराहना की।

बस्तर के युवाओं के लिए बन रहा आत्मनिर्भरता का मॉडल

विशाल हालदार का यह प्रोजेक्ट केवल एक उत्पाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक-आर्थिक मॉडल के रूप में उभर रहा है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से वे ग्रामीण युवाओं को इस पहल से जोड़ रहे हैं।

इस पहल के तहत—

  • ग्रामीणों को छिंद के बीज संग्रहण से आय का नया स्रोत मिलेगा
  • स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट्स विकसित होंगी
  • युवाओं के लिए रोजगार और स्टार्टअप अवसर बनेंगे
  • जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

विशाल का मानना है कि अगर संसाधनों का सही उपयोग हो, तो बस्तर जैसे क्षेत्र वैश्विक इनोवेशन हब बन सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

यह परियोजना केवल आर्थिक नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। अब तक जो बीज जंगलों में बेकार समझकर फेंक दिए जाते थे, वे अब मूल्यवान उत्पाद में बदल रहे हैं।

इससे—

  • वेस्ट मैनेजमेंट में सुधार
  • जंगल संसाधनों का सतत उपयोग
  • प्लास्टिक और केमिकल आधारित पेयों पर निर्भरता में कमी
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

जैसे प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।

भविष्य की योजना : वैश्विक बाजार तक पहुंच

विशाल हालदार की योजना इस हर्बल कॉफी को जल्द ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग और फाइन-ट्यूनिंग के अंतिम चरण में है।

जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी, जिसके बाद यह उत्पाद “बस्तर ब्रांड” के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।

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