छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर घमासान तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। जारी अधिसूचना के मुताबिक राज्य की षष्ठम विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित होगा और इस दौरान केवल एक ही बैठक में सरकारी कामकाज निपटाया जाएगा। हालांकि, सत्र का एजेंडा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
सत्र में निंदा प्रस्ताव की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहले ही संकेत दे चुके हैं कि
महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के रुख के खिलाफ सरकार
निंदा प्रस्ताव लाएगी। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा कांग्रेस पर महिलाओं
के अधिकारों को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाएगी।
पदयात्रा से सत्र तक बढ़ा मुद्दा
20 अप्रैल को रायपुर
में आयोजित ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विशेष सत्र बुलाने
की घोषणा की थी। इस पदयात्रा में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी
दलों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया था कि ये दल महिला आरक्षण कानून के
प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रहे हैं।
लोकसभा में अटका विधेयक
महिला आरक्षण को लेकर
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। 17 अप्रैल
को लोकसभा में पेश संविधान संशोधन विधेयक
आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका, जिसके चलते इसे पारित
नहीं किया जा सका। इस विधेयक का उद्देश्य 2029 से विधायिकाओं
में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा की सीटों में वृद्धि करना था।
सियासी टकराव के आसार
विशेष सत्र को लेकर
सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। एक तरफ भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे
पर खुद को महिला हितैषी साबित करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर देख रही है।
30
अप्रैल का यह विशेष सत्र न सिर्फ महिला आरक्षण पर राज्य का रुख स्पष्ट
करेगा, बल्कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति की दिशा
भी तय कर सकता है।

