वैश्विक ऊर्जा संकट और कूटनीतिक तनाव के बीच भारत ने मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में अपने रणनीतिक कदम तेज कर दिए हैं। तेल और गैस के अपार भंडार से भरपूर इस क्षेत्र को भारत अब अपने ऊर्जा भविष्य के केंद्र में रख रहा है। इसी बीच भारत और चीन के शीर्ष अधिकारियों की एक अहम मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप के भारत और चीन को लेकर दिए गए विवादित बयान ने पहले ही कूटनीतिक माहौल को गरमा दिया है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और बाधा के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पर संकट गहरा गया है।
भारत-चीन मुलाकात के मायने
विदेश मंत्रालय के
अनुसार, चीन के मिडिल ईस्ट मामलों के विशेष दूत झाई
जुन ने भारत की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों
पक्षों ने MENA क्षेत्र की ताजा परिस्थितियों और आपसी सहयोग
को मजबूत करने पर चर्चा की। यह संकेत देता है कि वैश्विक तनाव के बीच भारत और चीन
व्यावहारिक कूटनीति के जरिए साझा हितों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या है MENA और क्यों अहम
MENA (Middle East and North
Africa) क्षेत्र में करीब 19 से 27 देश शामिल माने जाते हैं। यह पूरा इलाका दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस
भंडारों का केंद्र है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ कहे जाने वाले इस क्षेत्र
में अस्थिरता का सीधा असर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ता है। यही वजह है कि
भारत BRICS के मंच के जरिए इस क्षेत्र से अपने रिश्ते मजबूत
कर रहा है।
BRICS और बदलती वैश्विक धुरी
BRICS
समूह अब तेजी से वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है। 2023
के जोहान्सबर्ग सम्मेलन में मिस्र, ईरान और
संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई MENA देशों को इसमें शामिल होने
का न्यौता दिया गया था। 2024 में इनमें से अधिकांश देश BRICS
का हिस्सा बन भी चुके हैं, जिससे यह समूह और
मजबूत हुआ है।
आज BRICS
दुनिया की लगभग 40% आबादी और एक-तिहाई वैश्विक
अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इसका प्रभाव अमेरिका के पारंपरिक
वर्चस्व को चुनौती देने की क्षमता रखता है।
ट्रंप के बयान से विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के
बीच डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान विवाद का कारण
बन गया, जिसमें भारत और चीन को लेकर अपमानजनक
टिप्पणी की गई थी। इस बयान की भारत में तीखी आलोचना हुई। बाद में अमेरिकी दूतावास
को सफाई देनी पड़ी और भारत को “महान देश” बताते हुए संबंधों की मजबूती पर जोर दिया
गया।
भारत के विदेश मंत्रालय
ने भी इस टिप्पणी को “अनुचित और तथ्यों से परे” बताया और स्पष्ट किया कि
भारत-अमेरिका संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं।
ऊर्जा और कूटनीति का नया समीकरण
स्पष्ट है कि वैश्विक
ऊर्जा संकट, होर्मुज में तनाव और BRICS
के विस्तार ने नई कूटनीतिक रेखाएं खींच दी हैं। भारत जहां MENA
क्षेत्र के जरिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है,
वहीं चीन भी इस क्षेत्र में सक्रिय है। ऐसे में दोनों देशों के बीच
संवाद भविष्य की भू-राजनीति को नया आकार दे सकता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मीना’ का यह तेल-खजाना वैश्विक
ताकतों के बीच सहयोग का पुल बनेगा या टकराव का नया मैदान।

