मेरठ के रेलवे रोड थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े देह व्यापार नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए एक महिला समेत पांच आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरोह एक रिहायशी इलाके में घर के भीतर से अपना काला साम्राज्य चला रहा था। पुलिस की इस दबिश के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं स्थानीय निवासियों ने पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर राहत की सांस ली है।
गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक
काफी समय से पुलिस को भाटीपुरा देवपुरी इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस की खुफिया टीम इस सूचना को पुख्ता करने में जुटी थी। मंगलवार को जब सटीक लोकेशन और सबूत मिले, तो पुलिस टीम ने बिना देरी किए बताए गए मकान की घेराबंदी कर दी। अचानक हुई इस छापेमारी में गिरोह को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके से पुलिस ने माजिद मलिक, दानियाल उर्फ साहिल, शाकिर, ताबिश और शगुफ्ता खान को गिरफ्तार किया है।
पति-पत्नी मिलकर चला रहे थे 'गंदा धंधा'
थाना प्रभारी जनार्दन प्रसाद ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड इरशाद पठान उर्फ पिंकू पठान है। जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इरशाद अपनी पत्नी शगुफ्ता खान के साथ मिलकर अपने ही घर से इस रैकेट का संचालन कर रहा था। पकड़े गए अन्य आरोपी इस नेटवर्क में 'एजेंट' की भूमिका निभाते थे, जिनका काम ग्राहकों को फंसाना और उन्हें ठिकाने तक पहुंचाना था। फिलहाल मुख्य आरोपी इरशाद पठान फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
आपत्तिजनक सामग्री और नकद बरामद
पुलिस ने छापेमारी के दौरान घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। बरामद सामान की सूची में शामिल है:
4 स्मार्टफोन: जिनसे ग्राहकों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों से संपर्क किया जाता था।
CCTV DVR: घर के बाहर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए कैमरों का डेटा।
नकद राशि: मौके से ₹4,200 बरामद किए गए।
स्कूटर: जिसका इस्तेमाल आरोपियों द्वारा आवाजाही के लिए किया जाता था।
अन्य सामग्री: मौके से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्रियां भी जब्त की गई हैं।
कानूनी शिकंजा और आगे की जांच
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। मोबाइल फोन और डीवीआर की फॉरेंसिक जांच से कई और सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके में इस तरह की गतिविधियों से सामाजिक माहौल खराब हो रहा था। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क की पूरी चेन को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
