बोलीवूड अभिनेता संजय दत्त की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘ आखरी सवाल’ आज 15 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। रिलीज से पहले ही यह फिल्म अपने विषय और ट्रेलर की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। फिल्म सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा नहीं, बल्कि भारत के आधुनिक इतिहास, वैचारिक संघर्ष, राजनीति और सामाजिक ध्रुवीकरण पर आधारित एक गंभीर सिनेमाई प्रस्तुति मानी जा रही है। फिल्म में महात्मा गांधी की हत्या, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कथित भूमिका, बाबरी मस्जिद विध्वंस, आपातकाल, मीडिया नैरेटिव और भारतीय राजनीति के कई संवेदनशील अध्यायों को छूने की कोशिश की गई है। यही कारण है कि फिल्म रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया, राजनीतिक हलकों और फिल्म इंडस्ट्री में बहस का केंद्र बन गई। ‘आखिरी सवाल’ उन फिल्मों में शामिल हो सकती है, जो मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा को प्रभावित करती हैं।
आखिरी सवाल’की कहानी
फिल्म की कहानी एक युवा रिसर्च स्कॉलर ‘विक्की’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो इतिहास और राजनीति से जुड़े कुछ ऐसे सवाल उठाता है, जिन्हें लंबे समय से विवादित माना जाता रहा है। विक्की अपने विश्वविद्यालय और प्रोफेसरों पर इतिहास को “एकतरफा तरीके से प्रस्तुत” करने का आरोप लगाता है। यहीं से कहानी में वैचारिक संघर्ष शुरू होता है। विश्वविद्यालय की बहस धीरे-धीरे राष्ट्रीय मुद्दा बन जाती है। टीवी डिबेट्स, राजनीतिक भाषण, छात्र आंदोलन और मीडिया ट्रायल के बीच कहानी कई ऐतिहासिक घटनाओं की परतें खोलती हुई आगे बढ़ती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं इतिहास को अपने-अपने तरीके से पेश करती रही हैं। कहानी यह सवाल उठाती है कि क्या देश के इतिहास के कुछ अध्यायों को पूरी सच्चाई के साथ जनता के सामने रखा गया या नहीं।महात्मा गांधी की हत्या और RSS पर बहस
फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ा विषय शामिल है। ट्रेलर में ऐसे संवाद और दृश्य दिखाए गए हैं, जिनमें गांधी हत्या के बाद RSS को लेकर बनी राजनीतिक बहस का जिक्र है।हालांकि मेकर्स ने स्पष्ट किया है कि फिल्म किसी संगठन को सीधे निशाना नहीं बनाती, बल्कि उस दौर की राजनीति और विचारधारा को समझने की कोशिश करती है। यह विषय भारत में हमेशा बेहद संवेदनशील रहा है। यही वजह है कि ट्रेलर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने फिल्म को “साहसी प्रयास” कहा, जबकि कुछ ने इसे “विवाद पैदा करने वाला कंटेंट” बताया।बाबरी मस्जिद और सांप्रदायिक राजनीति
फिल्म में 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना और उसके बाद देश में हुए राजनीतिक बदलावों की भी झलक दिखाई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि कैसे इस घटना ने भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीति और सामाजिक माहौल को हमेशा के लिए बदल दिया। निर्देशक ने बाबरी विवाद को सिर्फ धार्मिक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि मीडिया, राजनीति और जनभावनाओं के बड़े टकराव के रूप में पेश करने की कोशिश की है।आपातकाल और लोकतंत्र पर सवाल
फिल्म में 1975 के आपातकाल का भी उल्लेख किया गया है। ट्रेलर में ऐसे दृश्य दिखाई देते हैं, जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।फिल्म भारतीय लोकतंत्र के उन दौरों को जोड़ने की कोशिश करती है, जहां राजनीतिक फैसलों ने समाज और आम लोगों की जिंदगी को गहराई से प्रभावित किया। फिल्म में Sanjay Dutt प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी की भूमिका निभा रहे हैं। उनका किरदार एक ऐसे शिक्षाविद का है, जो इतिहास, राजनीति और विचारधारा के बीच फंसा हुआ दिखाई देता है। ट्रेलर में संजय दत्त के गंभीर संवाद और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया है। कई समीक्षकों का मानना है कि यह उनके करियर की सबसे अलग और गंभीर फिल्मों में से एक हो सकती है। फिल्म में अमित साध एक आक्रामक और सवाल पूछने वाले युवा के किरदार में नजर आएंगे। वहीं Sameera Reddy लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। नमाशी चक्रवर्ती और त्रिधा चौधरी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
निर्देशक अभिजीत मोहन वरांग
फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजित मोहन वरंग ने किया है। वह पहले भी सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए चर्चा में रहे हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “आखिरी सवाल किसी विचारधारा का प्रचार नहीं, बल्कि सवाल पूछने की कोशिश है। लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है।” उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी और शायद असहज भी करेगी, लेकिन यही इसका उद्देश्य है।
ट्रेलर रिलीज होते ही मचा विवाद
फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर आखरी सवाल ट्रेंड करने लगा। कुछ लोगों ने इसे “सच्चाई दिखाने वाली फिल्म” बताया, जबकि कुछ समूहों ने आरोप लगाया कि फिल्म इतिहास को राजनीतिक नजरिए से पेश कर रही है।कई राजनीतिक संगठनों ने फिल्म की सामग्री पर सवाल उठाए। वहीं कुछ बुद्धिजीवियों और फिल्म समीक्षकों ने इसे “बहस शुरू करने वाला सिनेमा” बताया।
विवाद ने फिल्म की चर्चा और लोकप्रियता दोनों को बढ़ा दिया है।
सेंसर बोर्ड से मिला UA 16+ सर्टिफिकेट
फिल्म को सेंसर बोर्ड (CBFC) से UA 16+ प्रमाणपत्र मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म में कई संवेदनशील राजनीतिक संवाद और ऐतिहासिक दृश्य होने के कारण सेंसर बोर्ड ने कुछ हिस्सों पर चर्चा की थी।
कुछ बदलावों और डिस्क्लेमर के बाद फिल्म को रिलीज की मंजूरी दी गई। राजनीतिक और इतिहास आधारित फिल्मों का भारत में हमेशा अलग दर्शक वर्ग रहा है। ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ जैसी फिल्मों की सफलता के बाद अब ‘आखिरी सवाल’ को भी उसी श्रेणी में देखा जा रहा है। फिल्म की शुरुआती कमाई अच्छी रह सकती है, क्योंकि विवाद और संवेदनशील विषय दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ा रहे हैं। भविष्य काफी हद तक दर्शकों की प्रतिक्रिया, समीक्षाओं और वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगा। देखने के बाद कई यूजर्स ने लिखा कि यह फिल्म “सोच बदलने वाली” हो सकती है। कुछ लोगों ने संजय दत्त के अभिनय की तारीफ की, जबकि कई यूजर्स ने इसे “राजनीतिक रूप से विस्फोटक फिल्म” बताया।
संजय दत्त की विवादित फ़िल्में
संजय दत्त बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में शामिल रहे हैं, जिनकी फिल्मों ने कई बार बड़े विवाद खड़े किए। उनकी निजी जिंदगी की तरह उनका फिल्मी करियर भी लगातार सुर्खियों में रहा है। 1993 में रिलीज हुई खलनायक उस समय विवादों में आ गई थी, जब फिल्म की रिलीज के दौरान संजय दत्त अवैध हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार हुए थे। फिल्म में उनके ‘बलराम प्रसाद’ उर्फ बल्लू के किरदार ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की, लेकिन इसी दौरान उनका नाम मुंबई ब्लास्ट केस से जुड़ने के कारण फिल्म लगातार चर्चा में रही।वास्तव
इसके बाद वास्तव मूवी में अंडरवर्ल्ड से जुड़े किरदार को लेकर बहस छिड़ी। फिल्म को क्लासिक माना गया, लेकिन अपराध और गैंगस्टर संस्कृति को दिखाने के तरीके पर सवाल भी उठे। वहीं PK धार्मिक मान्यताओं और अंधविश्वास पर व्यंग्य करने के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। इस फिल्म में संजय दत्त की भूमिका छोटी थी, लेकिन फिल्म विवादों के केंद्र में रही।
संजू
संजय दत्त की बायोपिक संजू भी काफी विवादित रही। कई लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्म में उनकी छवि सुधारने की कोशिश की गई और उनकी जिंदगी के कई गंभीर पहलुओं को नरम तरीके से दिखाया गया। वहीं सड़क 2 ने नेपोटिज्म विवाद के दौर में भारी आलोचना झेली।

