उम्मीद छोड़ दी थी कि मेरा फोन कभी वापस मिलेगा, पर पुलिस के एक फोन ने दिन बना दिया।" यह शब्द उस युवक के थे जिसका मोबाइल महीनों पहले खो गया था। कोरबा में यह किसी फिल्मी पटकथा जैसा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत में तब्दील हुआ जब एक साथ 75 लोगों के मोबाइल उन्हें वापस सौंपे गए।
तकनीक बनी हथियार: कैसे चला ऑपरेशन?
यह पूरी कहानी उन शिकायतों से शुरू हुई जो धीरे-धीरे साइबर पुलिस थाना कोरबा में जमा हो रही थीं। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में साइबर सेल ने एक खास रणनीति तैयार की। इस डिजिटल जंग में पुलिस ने CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
साइबर टीम ने तकनीक के जरिए उन मोबाइलों को ट्रेस करना शुरू किया जो अलग-अलग जिलों और राज्यों में सक्रिय थे। जैसे-जैसे लोकेशन बदलती गई, पुलिस का जाल भी फैलता गया। तकनीकी बारीकियों और लगातार ट्रैकिंग के बाद आखिरकार टीम उन मोबाइलों तक पहुँचने में सफल रही जो गुम हो चुके थे।
लाखों की बरामदगी और पुलिस का टीमवर्क
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले, नीतिश ठाकुर और नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी की देखरेख में साइबर थाना प्रभारी ललित चंद्रा और उप निरीक्षक अजय सोनवानी की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया।
बरामद किए गए हैंडसेट्स में Apple, Samsung, Oppo, Vivo, Redmi, और OnePlus जैसे महंगे ब्रांड शामिल थे। इन 75 मोबाइलों की कुल कीमत करीब 11.50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस के लिए यह सिर्फ गैजेट्स की बरामदगी नहीं थी, बल्कि लोगों का खोया हुआ डेटा और उनकी यादें वापस लौटाना था।
आंकड़ों में पुलिस की सफलता
कोरबा पुलिस की यह सक्रियता किसी एक दिन का परिणाम नहीं है। पिछले 4 महीनों के आंकड़े टीम की मेहनत की गवाही देते हैं:
कुल बरामद मोबाइल (4 माह में): 200 से अधिक
ताजा बरामदगी: 75 मोबाइल
अनुमानित कीमत: 11.50 लाख रुपये
तकनीकी आधार: CEIR पोर्टल और सर्विलांस
सिस्टम पर बढ़ा जनता का भरोसा
जब साइबर थाना परिसर में पीड़ितों को उनके फोन वापस मिले, तो कईयों की आँखें नम थीं। पुलिस का संदेश अब साफ है—तकनीक के इस दौर में अपराधी या गुमशुदा सामान छिप नहीं सकता।
पुलिस की अपील: यदि आपका मोबाइल गुम हो जाए, तो निराश होने के बजाय तुरंत CEIR पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें। आपकी सजगता और पुलिस की तत्परता मिलकर खोई हुई वस्तु को वापस ला सकती है।
यह ऑपरेशन सिर्फ मोबाइल की बरामदगी नहीं, बल्कि कोरबा पुलिस द्वारा जनता के बीच 'भरोसे की वापसी' का एक शानदार उदाहरण है।
