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बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट
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सहमति से संबंध रेप नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आरोपी को किया बरी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 29 Mar 2026, 06:10 PM · अपडेट: 27 Oct 2026, 04:40 PM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी को बरी कर दिया और पीड़िता की याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
बेमेतरा जिले की रहने वाली महिला ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की अनुमति मांगी थी। महिला का आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत के अनुसार, महिला एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी करती थी, जहां आरोपी से उसकी पहचान हुई। 19 जून 2022 को बातचीत शुरू हुई और 25 जुलाई 2022 को आरोपी ने शादी का भरोसा दिलाकर उसे अपने घर ले जाकर संबंध बनाए। घटना के समय महिला पहले से शादीशुदा थी और गर्भवती भी थी। सामाजिक कारणों से उसने तत्काल शिकायत दर्ज नहीं कराई, बाद में पति को जानकारी देने के बाद मामला दर्ज कराया गया।
ट्रायल कोर्ट का फैसला
मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। कोर्ट को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि महिला की सहमति दबाव, धमकी या धोखे से ली गई थी।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:
  • महिला बालिग थी और अपनी सहमति देने में सक्षम थी
  • यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने डर या दबाव बनाकर संबंध बनाए
  • महिला पहले से शादीशुदा और गर्भवती थी
  • कोर्ट ने कहा कि “सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता”।
याचिका खारिज
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पीड़िता की याचिका खारिज कर दी और आरोपी को बरी करने के आदेश को सही ठहराया।
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