छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। इस घटना में अब तक 17 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं और कई का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। हादसे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और जांच की मांग तेज हो गई है।यह दुर्घटना मंगलवार (14 अप्रैल) दोपहर सक्ती जिले के सिंघीतराई इलाके में स्थित Sakti district के एक पावर प्लांट में हुई, जो Vedanta Limited से जुड़ा बताया जा रहा है।
प्लांट में अचानक बॉयलर फटने से जोरदार धमाका हुआ, जिसके चलते वहां काम कर रहे कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 4 मजदूरों की मौत मौके पर ही हो गई थी, जबकि बाकी की मौत इलाज के दौरान रायगढ़, रायपुर और अन्य अस्पतालों में हुई। कुल 36 मजदूर झुलसे बताए जा रहे हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
राहत और बचाव कार्य
घटना के बाद प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मृतकों की पहचान कर ली गई है, जिनमें अधिकतर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।

मुआवजे और सहायता की घोषणा
घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ कंपनी की ओर से भी सहायता राशि की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) की ओर से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी, जो PMNRF से प्रदान होगी।
मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। वहीं वेदांता प्रबंधन की ओर से मृतकों के परिवारों को 35-35 लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही गई है। घायलों को 15-15 लाख रुपये सहायता देने की भी घोषणा की गई है।
विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रिया
इस हादसे को लेकर विपक्ष ने सरकार और कंपनी प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। Deepak Baij ने इसे सिर्फ हादसा नहीं बल्कि “लापरवाही से हुई मौत” बताते हुए मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये और घायलों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री TS Singh Deo ने सवाल उठाया कि प्लांट में एंबुलेंस तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जो श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विधायक Ramkumar Yadav ने आरोप लगाया कि प्लांट की मशीनों की सही तरीके से मरम्मत नहीं की गई थी और क्षमता से अधिक दबाव में काम लिया जा रहा था, जिससे बॉयलर ब्लास्ट हुआ।
वहीं सांसद Jyotsna Charandas Mahant ने कहा कि यह घटना सुरक्षा नियमों की लगातार अनदेखी का नतीजा है और पहले भी कंपनी के प्लांट्स में ऐसे हादसे हो चुके हैं।

सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
राज्य सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस ने भी 9 सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो मौके पर जाकर पीड़ितों, परिजनों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।
स्थिति अभी भी चिंताजनक
हादसे के बाद कई मजदूर अभी भी घायल हैं और कुछ के लापता होने की भी सूचना है। परिजनों ने प्रबंधन पर जानकारी छिपाने और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा, मशीनों के रखरखाव और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
हताहतों की स्थिति
- अब तक 17 मजदूरों की मौत की पुष्टि
- करीब 36 मजदूर झुलसे, कई की हालत गंभीर
- कुछ मजदूरों के अभी भी लापता होने की सूचना
- मृतकों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के मजदूर शामिल
