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फोटो साभार : जेमिनी
फोटो साभार : जेमिनी
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सियासी टकराव : नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का बिल संसद में अटका , पीएम ने जताया दुख, विपक्ष का पलटवार

यह मामला केवल एक विधेयक के पास या फेल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी, संवैधानिक प्रक्रिया और केंद्र-विपक्ष के रिश्तों को भी उजागर करता है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
19 Apr 2026, 12:44 AM
📍 नई दिल्ली

महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह प्रस्ताव गिर गया, जिसके बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम देश के नाम संबोधन में इस पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों को ठेस पहुंची है और इसके लिए उन्होंने माताओं-बहनों से माफी भी मांगी। पीएम ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के लिए राष्ट्रहित से अधिक दलगत राजनीति महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि जब यह प्रस्ताव गिरा, तब कुछ विपक्षी दलों ने खुशी जताई, जिसे देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।

वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सरकार संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम कर रही है और दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर तथा छोटे राज्यों के साथ भेदभाव कर उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

जानिए क्या हुआ है संसद में :  शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा 131वां विधेयक पेश किया गया था। इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था, लेकिन सरकार यह संख्या जुटाने में असफल रही।

  • बिल के पक्ष में: 298 वोट
  • बिल के विरोध में: 230 वोट
    आवश्यक संख्या न मिलने के कारण विधेयक गिर गया।

मामले के अन्य अहम पहलू

  • महिला आरक्षण का महत्व : यह विधेयक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे लंबे समय से लंबित सामाजिक-राजनीतिक सुधार माना जाता है।
  • संवैधानिक बाध्यता : ऐसे संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए साधारण बहुमत नहीं, बल्कि दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो इस बार सरकार के पास नहीं था।
  • सियासी ध्रुवीकरण : इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव सामने आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महिला आरक्षण जैसे मुद्दे भी अब राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
  • क्षेत्रीय असंतुलन का आरोप : विपक्ष का दावा है कि प्रस्तावित संशोधन से कुछ राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती थी, जिससे दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में असंतोष बढ़ सकता है।
  • चुनावी प्रभाव : आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा महिला मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्ष इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश करेंगे।
  • भविष्य की रणनीति : सरकार इस विधेयक को दोबारा लाने या विपक्ष को साथ लेने की रणनीति पर विचार कर सकती है, क्योंकि महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील और जनसमर्थन वाला है।
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