राज्यसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा के दूसरे दिन सदन का माहौल काफी सक्रिय रहा। इसी बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तहत राज्यसभा के उपसभापति पद पर हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर चुना गया। वे लगातार तीसरी बार इस जिम्मेदारी को संभालेंगे, जिसे सदन में उनके प्रति भरोसे और उनके कार्य प्रदर्शन की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस दौरान राज्यसभा में उपस्थित रहे और उन्होंने हरिवंश नारायण सिंह को उपसभापति पद पर पुनः निर्वाचित होने पर बधाई दी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक औपचारिक चुनाव नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि सदन को उनके कामकाज और कार्यशैली पर गहरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि हरिवंश जी ने हमेशा प्रयास किया है कि सदन में सभी पक्षों को साथ लेकर चला जाए और चर्चा का स्तर बेहतर बना रहे।
संतुलित कार्यशैली से सदन की गरिमा को मजबूती
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह ने न केवल कार्यवाही के संचालन में संतुलन बनाए रखा है, बल्कि अपने लंबे अनुभव का उपयोग करके सदन की चर्चाओं को अधिक प्रभावी और सार्थक बनाने में योगदान दिया है। उनके अनुसार, उनकी सहज और संतुलित कार्यशैली ने सदन की गरिमा को मजबूत किया है।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने हरिवंश नारायण सिंह के जीवन से जुड़े कुछ पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनका जन्म जयप्रकाश नारायण के गांव से जुड़ा है और उनकी शिक्षा-दीक्षा काशी में हुई है, जिससे उनके व्यक्तित्व पर ग्रामीण और शहरी दोनों अनुभवों का प्रभाव दिखता है।
350 से अधिक कार्यक्रमों में लिया भाग
प्रधानमंत्री ने आगे 17 अप्रैल की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती भी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हरिवंश नारायण सिंह का चंद्रशेखर के साथ पुराना जुड़ाव रहा है, जो इस अवसर को और भी विशेष बनाता है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बताया कि 2018 में उपसभापति का दायित्व संभालने के बाद से हरिवंश नारायण सिंह ने शैक्षणिक संस्थानों—कॉलेजों और विश्वविद्यालयों—में 350 से अधिक कार्यक्रमों में भाग लिया है, जो उनके सार्वजनिक जीवन और विचारों को साझा करने की सक्रियता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम में राज्यसभा के भीतर नेतृत्व, अनुभव और संसदीय परंपराओं की निरंतरता पर जोर दिखाई दिया, जबकि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा भी समानांतर रूप से जारी रही।