20 सिंधी पंचायतें एक मंच पर : सिंधी समाज की एकता पर होगा मंथन, 26 जुलाई को प्रदेश स्तरीय मुखी संवाद
रायपुर के जोरा स्थित प्रतिष्ठा द बैंक्वेट हॉल में 26 जुलाई को पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत का प्रदेश स्तरीय मुखी संवाद आयोजित होगा। इसमें प्रदेश की करीब 120 सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधि नए संविधान, सामाजिक एकता, पारिवारिक मुद्दों और संगठन को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।
कीर्तिमान डेस्क
19 Jul 2026, 01:03 PM
रायपुर
पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत की ओर से 26 जुलाई को रायपुर के जोरा स्थित प्रतिष्ठा द बैंक्वेट हॉल में प्रदेश स्तरीय मुखी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में प्रदेश की लगभग 120 सिंधी पंचायतों के मुखी, पदाधिकारी और समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
आयोजन का उद्देश्य समाज को अधिक संगठित, सशक्त और एकजुट बनाने के साथ-साथ भविष्य की कार्ययोजना पर सामूहिक चर्चा करना है। सम्मेलन के दौरान पंचायत के प्रस्तावित नए संविधान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। विभिन्न पंचायतों से प्राप्त सुझावों के आधार पर संविधान को अंतिम रूप देने और उसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की योजना बनाई जाएगी।
सिंधी समाज का महा-सम्मेलनतैयारियों को लेकर हुई रायपुर की पंचायतों की बैठक
समाज के भीतर रिश्तों में बढ़ती दूरियां, आपसी विश्वास में कमी, पारिवारिक विवाद और सामाजिक समरसता जैसे महत्वपूर्ण विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में पंचायतों की भूमिका क्या हो सकती है, इस पर भी सभी प्रतिनिधि अपने विचार साझा करेंगे। मुखी संवाद कार्यक्रम की तैयारियों के लिए रायपुर शहर की विभिन्न सिंधी पंचायतों की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सभी पंचायतों के प्रतिनिधियों को 26 जुलाई के सम्मेलन का औपचारिक निमंत्रण दिया गया और आयोजन से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने समाज की एकता को और मजबूत बनाने, आपसी सहयोग बढ़ाने तथा सामूहिक रूप से सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कई वरिष्ठ पदाधिकारी और समाज के मुखी रहे उपस्थित
बैठक में बाबा मुरलीधर उदासी, प्रदेश अध्यक्ष महेश दरयानी, अमित चिमनानी, बलराम आहूजा, अमर पारवानी, राज विक्रम, गिरीश लहजा, कैलाश बालानी, अच्छूमल गावरी, अर्जुनदास ओछवानी, रमेश मिर्घानी, जीवत बजाज, तनैश आहूजा, जोधाराम वधवाणी, प्रकाश रहेजा और मुरलीधर केवलानी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा हरनाम तलरेजा, गुरुनामल रोहरा, सतरामदास बजाज और नरसा लालवानी समेत कई मुखियों ने भी अपने सुझाव रखे। आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में विकास रूपरेला, अनिल लाहौरी, मनीष पंजवानी और अमर चंदानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था के सह-प्रवक्ता गौरव मंधानी ने कार्यक्रम की जानकारी साझा की।