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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़

24 घंटे में पलटा आदेश : कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक वापस

छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने वाला आदेश 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। आदेश में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी, लेकिन विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा। कांग्रेस ने फैसले के समय और मंशा पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है। सरकार का कहना है कि यह पहले से लागू नियमों की पुनरावृत्ति थी, जबकि विपक्ष इसे स्पष्टता की कमी और राजनीतिक कदम बता रहा है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
23 Apr 2026, 07:41 PM
📍 रायपुर

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने वाला आदेश महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया। इस फैसले ने प्रदेश की सियासत में अचानक हलचल बढ़ा दी है और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, बुधवार देर रात जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया था कि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी राजनीतिक दल में पद नहीं रखेगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेगा। आदेश में उल्लंघन की स्थिति में सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि आदेश जारी होते ही इसका विरोध शुरू हो गया। विपक्षी दलों के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताई। बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने गुरुवार को यह आदेश वापस ले लिया।

कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर सरकार को घेरते हुए आदेश के समय और मंशा पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि ऐसे नियम पहले से ही लागू हैं, फिर नए सर्कुलर की जरूरत क्यों पड़ी। पार्टी ने यह भी पूछा कि क्या Rashtriya Swayamsevak Sangh जैसे संगठनों के कार्यक्रमों में भाग लेना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

पहले से लागू हैं नियम
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को निष्पक्षता और ईमानदारी बनाए रखना अनिवार्य है। नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि कर्मचारी किसी राजनीतिक दल की सक्रिय सदस्यता नहीं ले सकते और न ही राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।

सरकार की सफाई
सरकार का कहना है कि जारी किया गया सर्कुलर नए नियम नहीं थे, बल्कि पहले से लागू प्रावधानों की पुनरावृत्ति मात्र था। हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित कदम बता रहा है।

अब भी उठ रहे सवाल
आदेश वापस लेने के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। विपक्ष अब भी यह स्पष्ट करने की मांग कर रहा है कि किन गतिविधियों को ‘राजनीतिक’ माना जाएगा, खासकर विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों के संदर्भ में।

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