दिल्ली की राजनीति में उस समय बड़ा उथल-पुथल देखने को मिला जब सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और वह अपने कई सहयोगी सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो रहे हैं। हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से पूरी तरह नहीं की गई है, लेकिन इस दावे ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में आयोजित एक कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने “खून-पसीने” से सींचा था, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और लक्ष्यों से भटक गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी अब व्यक्तिगत हितों की ओर बढ़ रही है, जिससे वे लंबे समय से असंतुष्ट थे। इसी असंतोष के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
दो-तिहाई से अधिक बीजेपी में शामिल होने की तैयारी
इसी कथित बयान में यह भी कहा गया कि राघव चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक राज्यसभा सांसद भी बीजेपी में शामिल होने की तैयारी में हैं। जिन नामों का उल्लेख सामने आया है, उनमें स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद के रूप में चर्चित), संदीप पाठक, अशोक मित्तल और राजेंद्र गुप्ता जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों को लेकर राजनीतिक स्तर पर स्पष्टता नहीं है।
पार्टी के भीतर मतभेद
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था, जिसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ गए थे। इसके बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं।
पंजाब सरकार को कमजोर करने की कोशिश
वहीं दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक दबाव और डर का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और इसके पीछे केंद्र की राजनीति का हाथ हो सकता है। संजय सिंह ने यह भी कहा कि इस तरह के दावे जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाज़ी
इस पूरे घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का भी नाम राजनीतिक बयानबाज़ी में लिया जा रहा है, जहां कुछ नेताओं का आरोप है कि यह सब केंद्रीय नेतृत्व के इशारों पर हो रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कुल मिलाकर, इस कथित राजनीतिक घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक सियासी हलचल तेज कर दी है। AAP और BJP दोनों ही दलों के समर्थक इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, यह आने वाले समय में आधिकारिक बयानों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

