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राष्ट्रीय आम महोत्सव के समापन समारोह
राष्ट्रीय आम महोत्सव के समापन समारोह
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भव्य समापन : अमराई परंपरा को फिर से जीवंत करने की जरूरत - बृजमोहन अग्रवाल 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव का भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति में आम के धार्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए गांवों में अमराई (आम बाग) की परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने आयोजन की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि देशभर के 400 से अधिक किसानों द्वारा 250 किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Jun 2026, 12:19 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 11:43 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव का आज भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की।

मुख्य अतिथि बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में आम को अत्यंत पवित्र और विशेष स्थान प्राप्त है। आम के फल के साथ-साथ इसके पत्ते और लकड़ी का भी धार्मिक अनुष्ठानों एवं परंपराओं में महत्वपूर्ण उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि पहले गांव-गांव में जनसहयोग से “अमराई” (आम के बाग) लगाने की परंपरा थी, जो अब धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

 किस्मों का भव्य प्रदर्शन

उन्होंने बताया कि यह महोत्सव बेहद सफल और अनोखा आयोजन रहा, जिसमें देशभर के 400 से अधिक किसानों ने भाग लिया। लगभग 250 किस्मों के करीब 2000 आम के प्रादर्श प्रदर्शित किए गए, जिनमें व्यावसायिक, संकर, देशी, विशिष्ट और विदेशी किस्में शामिल थीं। तीन दिनों तक बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।  अग्रवाल ने बताया कि महोत्सव के दौरान लगभग 20 से 25 लाख रुपये के आम और पौधों की बिक्री हुई, जो आयोजन की बड़ी सफलता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, वैज्ञानिकों, आयोजन समिति और किसानों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

 कृषि विश्वविद्यालय का प्रयास

कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब यह राष्ट्रीय आम महोत्सव आयोजित किया गया है और इसे जनता का जबरदस्त समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष इस महोत्सव को और अधिक भव्य और विस्तृत रूप में आयोजित किया जाएगा। डॉ. चंदेल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु आम उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। राज्य में लगभग 46 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से करीब 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फल उत्पादन हो रहा है, जिसमें लगभग 1 लाख हेक्टेयर में आम की खेती शामिल है।

 सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे आकर्षण

महोत्सव के दौरान आम से बने व्यंजनों, सजावट, क्विज, फैंसी ड्रेस, मॉडल और बोनसाई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यालय और महाविद्यालय के विद्यार्थियों, महिलाओं एवं किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या ने भी कार्यक्रम को आकर्षक बनाया। महोत्सव में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, अलफांसो, तोतापरी सहित कई व्यावसायिक किस्मों की प्रतियोगिता हुई। वहीं मल्लिका, आम्रपाली, रत्ना जैसी संकर किस्मों के साथ नूरजहां, हाथीझुल जैसी विशिष्ट किस्में और मियाजाकी, टॉमी एटकिन्स जैसी विदेशी किस्में भी प्रदर्शित की गईं।

 किसानों को मिला मार्गदर्शन

कार्यक्रम में आम उत्पादन तकनीक पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। किसानों को सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रसिद्ध शेफ आकांक्षा रॉय ने आम के विभिन्न व्यंजन बनाने का प्रशिक्षण दिया। समारोह में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को भी सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, अधिकारी, प्रगतिशील किसान और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम ने एक व्यापक कृषि-वैज्ञानिक उत्सव का स्वरूप लिया।

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