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राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम
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बड़ी पहल : बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार, सरकार ने शुरू की तैयारी

बस्तर संभाग के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के गांवों का सर्वे कर जैविक प्रमाणन कराने और किसानों को बड़े बाजारों से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। प्रमाणन के बाद किसानों को उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने और आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 11 Jul 2026, 04:51 PM · अपडेट: 31 Oct 2026, 02:51 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
बस्तर संभाग के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बड़े बाजारों तक पहुंचाने तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बस्तर के उन गांवों की पहचान कर उनका जैविक प्रमाणन कराने के निर्देश दिए
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त हुए ग्रामों के अपने बस्तर प्रवास के दौरान अनेक किसानों ने उन्हें जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ा जाए, ताकि उनके उत्पादों का विधिवत जैविक प्रमाणन कराया जा सके और उन्हें देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ यूरोप सहित अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सके।

जैविक खेती को बढ़ावा

शर्मा ने कहा कि जैविक प्रमाणन के बाद बस्तर के किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा तथा बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। बैठक में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी), सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के अंतर्गत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए ताकि बस्तर के उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकें। इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का निर्माण कर उत्पादन का हर किसी को भागीदार बनाया जाएगा।

बस्तर के गांवों का होगा सर्वे

उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दल एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जैविक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेंगे तथा जैविक उत्पादों के लिए आवश्यक परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके द्वारा पूरे ग्राम पंचायतों को जैविक प्रमाणन दिलाकर बस्तर के उत्पादों को बिहान के छत्तीसकला ब्रांड द्वारा एक्सपोर्ट किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एनपीओपी प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन सालों की अवधि की आवश्यकता को बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त वनोत्पादों को प्रमाणन की आवश्यकता ना होने से उसे भी एक्सपोर्ट रेडी करने के लिए तैयारी करने को कहा ताकि बस्तर के लोगों को वनोत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

जैविक प्रमाणन प्रक्रिया होगी तेज

उप मुख्यमंत्री ने जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को गति देने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रमाणन संस्थाओं की सेवाएं लेने तथा सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी कदम शीघ्र उठाने के निर्देश भी दिए। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, सचिव भीम सिंह, सचिव धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन, एपीडा के अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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