जहाजों में क्या आ रहा है? जानिए पूरा गणित
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे इन 15 जहाजों में लाखों टन खाद और कच्चा माल मौजूद है, जो खरीफ और आगामी फसलों के लिए संजीवनी का काम करेगा:
यूरिया: कुल 8 जहाजों में करीब 3.32 लाख मीट्रिक टन (LMT) यूरिया भारत आ रहा है।
DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट): 4 जहाजों में 2.57 LMT डीएपी लदा है।
सल्फर: 3 जहाजों के जरिए 1.11 LMT सल्फर की खेप पहुंच रही है।
राहत की बात यह भी है कि सिर्फ यही 15 जहाज नहीं, बल्कि इसी रास्ते से 5 और जहाज जल्द ही भारत की सीमा में दाखिल होने वाले हैं।
वैश्विक संकट पर बोले जेपी नड्डा— 'पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार सतर्क'
इस पूरे घटनाक्रम और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा,"पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई और जहाजों को भारत पहुंचने में सामान्य से कहीं ज्यादा वक्त लगने लगा। इस संकट का असर सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ा है।" उन्होंने आगे कहा, "इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार पहले दिन से सतर्क थी और हमने हर स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर रखी थी, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।"
संकट के बावजूद किसानों पर नहीं आने दी आंच
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद की कीमतें आसमान छूने के बावजूद केंद्र सरकार ने इसका बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया और सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखा। इस संकट का एक बड़ा असर यह हुआ था कि घरेलू फर्टिलाइजर प्लांट्स को मिलने वाली नेचुरल गैस की सप्लाई घटकर महज 35% रह गई थी (यानी करीब 65% की भारी गिरावट आई थी)। लेकिन सरकार के ठोस प्रयासों के बाद अब राहत की खबर यह है कि फर्टिलाइजर प्लांटों को मिलने वाली यह नेचुरल गैस सप्लाई अब 100% यानी पूरी तरह बहाल कर दी गई है। इससे देश के भीतर भी खाद का उत्पादन अब दोगुनी तेजी से शुरू हो गया है।