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रोल्स-रॉयस ने भारत के AMCA कार्यक्रम के लिए पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण
रोल्स-रॉयस ने भारत के AMCA कार्यक्रम के लिए पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण
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भारत : पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को मिला बड़ा प्रस्ताव, रोल्स-रॉयस करेगी सहयोग

ब्रिटेन की एयरो इंजन कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत में एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने और AMCA पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए इंजन विकास में सहयोग का प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण के साथ स्वदेशी इंजन निर्माण में मदद की पेशकश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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प्रकाशित: 04 Jun 2026, 11:21 AM · अपडेट: 28 Oct 2026, 04:31 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
भारत के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव सामने आया है। ब्रिटेन की प्रमुख एयरो इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत में अत्याधुनिक एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने और उन्नत लड़ाकू विमान इंजन तकनीक के विकास में सहयोग देने की पेशकश की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। AMCA कार्यक्रम को भारतीय वायुसेना के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

AMCA कार्यक्रम

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत द्वारा विकसित किया जा रहा पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान है। इसे अत्याधुनिक सेंसर, स्टेल्थ तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणाली और लंबी दूरी की मारक क्षमता से लैस करने की योजना है। इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती एक शक्तिशाली और आधुनिक इंजन का विकास माना जा रहा है। भारत लंबे समय से ऐसा इंजन विकसित करने का प्रयास कर रहा है जो भविष्य के लड़ाकू विमानों की जरूरतों को पूरा कर सके। इसी संदर्भ में रोल्स-रॉयस का प्रस्ताव बेहद महत्वपूर्ण है।

पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण 

रिपोर्ट के अनुसार रोल्स-रॉयस ने भारत को केवल इंजन आपूर्ति का प्रस्ताव नहीं दिया है, बल्कि पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) के साथ देश में एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की पेशकश की है। कंपनी का कहना है कि इस परियोजना के तहत भारत में ही आधुनिक लड़ाकू विमान इंजन विकसित और निर्मित किए जा सकते हैं। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो भारत को उन्नत जेट इंजन तकनीक तक सीधी पहुंच मिल सकती है, जिसे दुनिया की सबसे जटिल रक्षा तकनीकों में गिना जाता है।

यूके सरकार 

रोल्स-रॉयस के कार्यकारी उपाध्यक्ष (ट्रांसफॉर्मेशन इंडिया) शशि मुकुंदन के अनुसार कंपनी के प्रस्ताव को ब्रिटेन सरकार का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि भारत में स्थापित होने वाला एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स देश के रक्षा क्षेत्र को नई तकनीकी क्षमता प्रदान कर सकता है।  उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल इंजन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को भविष्य में स्वतंत्र रूप से उन्नत एयरो इंजन विकसित करने की क्षमता प्रदान करना भी है।

MRO सुविधा स्थापित 

रोल्स-रॉयस भारत में एक आधुनिक रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। शुरुआत में यह केंद्र लड़ाकू विमानों के इंजनों पर केंद्रित रहेगा।इस सुविधा के माध्यम से इंजन के रखरखाव, मरम्मत और उन्नयन का काम भारत में ही किया जा सकेगा। इससे रक्षा क्षेत्र में समय और लागत दोनों की बचत होने की संभावना है।

नागरिक विमानन क्षेत्र 

कंपनी की योजना केवल सैन्य विमानों तक सीमित नहीं है। समय के साथ इस तकनीकी ढांचे का उपयोग नागरिक विमानन क्षेत्र में भी किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है तो भारत वैश्विक एयरो इंजन निर्माण और रखरखाव क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

आत्मनिर्भर भारत 

जेट इंजन तकनीक दुनिया की सबसे जटिल और संवेदनशील तकनीकों में से एक मानी जाती है। यदि भारत को इस क्षेत्र में वास्तविक तकनीकी हस्तांतरण प्राप्त होता है तो यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। साथ ही इससे भारत को भविष्य में अपने लड़ाकू विमानों, ड्रोन और अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म के लिए स्वदेशी इंजन विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

रणनीतिक दृष्टि 

भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में रोल्स-रॉयस का यह प्रस्ताव केवल एक व्यावसायिक समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने वाला कदम माना जा रहा है। अब रक्षा विशेषज्ञों और उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती हैं। यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है तो AMCA कार्यक्रम और भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के लिए यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।
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