विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले स्थित उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है। यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त शोध प्रयासों से संभव हुई हैगरियाबंद वनमंडल के डीएफओ श्री वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट और प्रमाणिक चित्र प्राप्त हुए हैं। इससे यह सिद्ध हुआ है कि Udanti Sitanadi Tiger Reserve का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र न केवल स्वस्थ है, बल्कि यह दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास भी बना हुआ है।
स्वच्छ जल स्रोतों के जैव संकेतक हैं ऊदबिलाव
ऊदबिलाव अत्यंत संवेदनशील वन्यजीव होते हैं जो केवल स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण रहित जल स्रोतों में ही पाए जाते हैं। यह नदियों, तालाबों और मीठे जल की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इनकी उपस्थिति किसी क्षेत्र की पर्यावरणीय सेहत और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।विश्व में ऊदबिलाव की लगभग 13 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत में मुख्यतः तीन प्रजातियां पाई जाती हैं—यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव।विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। विश्व ऊदबिलाव दिवस का उद्देश्य और महत्वहर वर्ष 27 मई को World Otter Day मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों पर ध्यान आकर्षित करना है।प्रमुख खतरे इस प्रकार हैं—प्राकृतिक आवास का नुकसान, जल प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार एवं तस्करी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष।
छत्तीसगढ़ में 2021 से लगातार शोध और संरक्षण कार्य
छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव संरक्षण की दिशा में वर्ष 2021 से निरंतर शोध कार्य किया जा रहा है। राज्य शासन के मार्गदर्शन में Chhattisgarh Science Sabha को ऊदबिलाव ध्ययन और संरक्षण का दायित्व सौंपा गया है।छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप और मैदानी सर्वे के माध्यम से उनके व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। शोधकर्ता श्रीमती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी जा चुकी है, जिसमें कई जिलों में ऊदबिलाव की पुष्टि की गई है।वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह हुआ है कि स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण अब ऊदबिलाव संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं।कई क्षेत्रों में ग्रामीणों द्वारा स्वयं वन विभाग को ऊदबिलाव रेस्क्यू की सूचना भी दी जा रही है, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।वन विभाग की अपील: जल स्रोतों को रखें स्वच्छ
वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने आमजन से अपील की है कि नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ रखा जाए। प्लास्टिक, कांच और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को जल में न फेंका जाए तथा जंगलों में आग लगने की स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचित किया जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें सामुदायिक भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जल स्रोत ही इस दुर्लभ प्रजाति के भविष्य की गारंटी हैं।
