भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध लगातार नई मजबूती हासिल कर रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। अब हालिया कूटनीतिक गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि नई दिल्ली और कैनबरा के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत होते जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने हाल ही में अपनी संसद में भारत की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं अगले सप्ताह ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस भी भारत के दौरे पर आने वाले हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री क्वाड देशों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंची थीं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलाव
भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती निकटता को केवल द्विपक्षीय संबंधों के नजरिए से नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी एक बड़ी वजह हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य एवं रणनीतिक मौजूदगी लगातार बढ़ाई है। कई देशों ने चीन की आक्रामक नीतियों और समुद्री दावों को लेकर चिंता जताई है।ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग को क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश खुले, स्वतंत्र और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करते रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी रक्षा सहयोग बनता जा रहा है। दोनों देशों की सेनाएं नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भाग ले रही हैं। ऑस्ट्रेलिया अब भारत के साथ होने वाले प्रमुख नौसैनिक अभ्यास 'मालाबार' का भी हिस्सा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने, रक्षा तकनीक और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि समुद्री व्यापार मार्ग सुरक्षित और सभी देशों के लिए खुले रहने चाहिए
QUAD बना सहयोग का मंच
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते संबंधों में क्वाड (QUAD) की भी अहम भूमिका है। इस समूह में भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान शामिल हैं। QUAD का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के संदर्भ में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच क्वाड देशों की एकजुटता क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
आर्थिक संबंध भी मजबूत
रक्षा और सुरक्षा के अलावा भारत और ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ऑस्ट्रेलिया भारत को कोयला, खनिज, शिक्षा और कृषि उत्पाद उपलब्ध कराता है, जबकि भारत से आईटी सेवाएं, दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद और अन्य वस्तुओं का निर्यात बढ़ रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को कई गुना बढ़ाना है। निवेश, हरित ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
चीन को लेकर चिंता
भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के पीछे एक बड़ा कारण चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं भी हैं चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में सैन्य ढांचे का विस्तार, ताइवान को लेकर बढ़ता तनाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने के प्रयास कई देशों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया सार्वजनिक रूप से किसी देश का नाम लेकर विरोध नहीं करते, लेकिन दोनों देश नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और समुद्री स्वतंत्रता की लगातार वकालत करते हैं।
मोदी की संभावित ऑस्ट्रेलिया यात्रा
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को लेकर व्यक्त उत्साह ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते और नई पहल देखने को मिल सकती हैं। यदि प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया का दौरा करते हैं, तो रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिल सकती है।
हिंद-प्रशांत में साझेदारी का उदय
भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती निकटता केवल दो देशों के रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभर रही नई रणनीतिक संरचना का भी संकेत है। बदलते वैश्विक हालात, बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच दोनों देश सहयोग, स्थिरता और संतुलन की नई धुरी बनते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
