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धर्मेंद्र प्रधान की पारिवारिक पृष्ठभूमि आरएसएस की रही है
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा : क्या दबाव में आएगी मोदी सरकार या जारी रहेगी सख्त रणनीति ?

NEET विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। विपक्ष और प्रदर्शनकारी सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जबकि केंद्र ने संसद में चर्चा की बात कही है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, मोदी सरकार आमतौर पर दबाव में मंत्रियों से इस्तीफा लेने से बचती रही है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 23 Jul 2026, 05:03 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 02:54 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
नीट परीक्षा विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। छात्रों, अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने के बाद आंदोलन का दायरा बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) सहित कई संगठनों का आरोप है कि नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और छात्रों से जुड़े गंभीर मामलों की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है। इसी मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। 20 जुलाई को सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का पत्र सौंपा।

मोदी सरकार की रणनीति क्या रही है ? 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मोदी सरकार का रिकॉर्ड बताता है कि वह आमतौर पर राजनीतिक दबाव में मंत्रियों से इस्तीफा लेने से बचती रही है। 2014 के बाद ऐसे बहुत कम मौके आए हैं जब किसी मंत्री ने केवल विरोध या आंदोलन के दबाव में पद छोड़ा हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार पहले यह आंकलन करती है कि किसी विवाद का चुनावी असर कितना पड़ सकता है। यदि किसी मुद्दे से राजनीतिक नुकसान की संभावना बढ़ती है, तभी बड़े फैसले लिए जाते हैं। नीट विवाद को लेकर भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार धर्मेंद्र प्रधान को हटाने जैसा कदम उठाएगी या फिर मौजूदा रणनीति के तहत विरोध को संभालने की कोशिश करेगी। 
           मोदी सरकार के बारे में कहा जाता है कि इस्तीफ़ा नहीं देना उनकी रणनीति का हिस्सा है

धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक कद भी अहम 

विशेषज्ञों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के उन नेताओं में शामिल हैं जिनका संगठन में मजबूत प्रभाव है। लंबे समय से पार्टी से जुड़े होने के अलावा उन्हें केंद्रीय नेतृत्व के करीब माना जाता है। ऐसे में उनका इस्तीफा केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं होगा, बल्कि सरकार की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल खड़े कर सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार इस मामले में जल्दबाजी से बच रही है।

सरकार ने क्या कहा ? 

विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में नीट परीक्षा से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है और छात्रों के सवालों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल विरोध नहीं, बल्कि समाधान और जवाबदेही चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने बयान में इस्तीफे का कोई संकेत नहीं दिया। 

क्या इस्तीफे से बीजेपी को नुकसान हो सकता है ? 

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मंत्री का इस्तीफा तभी लिया जाता है जब सरकार को लगता है कि इससे राजनीतिक नुकसान कम हो सकता है या जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा। जानकारों के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नीट विवाद आने वाले चुनावों में कितना असर डालेगा। आंदोलन में छात्र और युवा बड़ी संख्या में जुड़े हैं, लेकिन चुनावी मुद्दे अक्सर अलग होते हैं। विपक्ष इस मुद्दे को कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना पाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। 
सीजेपी के संसद मार्च में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया था

पहले भी उठती रही है मंत्रियों के इस्तीफे की मांग 

मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बार विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों पर मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की है। कोरोना काल, किसान आंदोलन, रेल हादसे और अन्य विवादों के दौरान भी ऐसी मांगें उठीं, लेकिन सरकार ने आमतौर पर दबाव में फैसले नहीं लिए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मोदी सरकार की कार्यशैली में मंत्री बदलने या विभागों में फेरबदल का फैसला चुनावी समीकरण और प्रशासनिक जरूरतों को देखकर लिया जाता है, न कि केवल विपक्ष के दबाव में। 

नैतिक जिम्मेदारी पर बहस 

वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गंभीर खामियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका तर्क है कि अगर किसी मंत्रालय के कामकाज में बड़ी विफलता सामने आती है तो मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। भारतीय राजनीति में पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब मंत्रियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। लाल बहादुर शास्त्री और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेताओं के इस्तीफे को अक्सर जवाबदेही के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।

फिलहाल क्या है स्थिति ? 
                            प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की सख़्ती

मौजूदा हालात में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। संसद में चर्चा की संभावना भी है, लेकिन इस्तीफे की मांग पर सरकार का रुख अभी तक साफ है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बढ़ता जनदबाव मोदी सरकार को अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर करेगा या फिर सरकार अपनी मौजूदा रणनीति के तहत इस विवाद को संभालने की कोशिश करेगी।
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