छत्तीसगढ़ सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामला अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंच गया है, जहां कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा है कि नियुक्तियां किन नियमों और मापदंडों के तहत की गईं। राजनांदगांव निवासी प्रदीप शर्मा ने अधिवक्ता अली असगर के माध्यम से याचिका दायर कर नियुक्तियों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन की अनदेखी का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अली असगर ने कहा कि राज्य सरकार ने नियुक्तियों में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों—नमित शर्मा बनाम भारत संघ मामला और अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ मामला—में तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। याचिका में दावा किया गया है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को दरकिनार करते हुए नियुक्तियां की गईं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ऐसे मामलों में प्रक्रिया की निगरानी करता रहा है।
6 महीने में ‘अयोग्य’ से ‘योग्य’ कैसे?
याचिकाकर्ता ने चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2024 में जिन दो उम्मीदवारों को सूचना आयुक्त पद के लिए अयोग्य ठहराया गया था, उन्हें मात्र छह महीने बाद ही योग्य मानते हुए नियुक्त कर दिया गया। इस बदलाव को लेकर याचिका में कहा गया है कि मापदंडों में अचानक परिवर्तन से पूरी चयन प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है और निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े होते हैं।
सर्च कमेटी और इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी सवाल
याचिका में सर्च कमेटी की संरचना को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। बताया गया कि अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु और महाराष्ट्र में इस समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में इसमें केवल प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया। इसके अलावा, एक उम्मीदवार का इंटरव्यू उन्हीं अधिकारियों ने लिया जो प्रशासनिक रूप से उनके अधीन थे। साथ ही, एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मुख्य सचिव पद पर रहते हुए ही इंटरव्यू देने को भी प्रशासनिक शुचिता के खिलाफ बताया गया है।
कोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए बिंदुओं को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार यह बताए कि चयन प्रक्रिया में किन नियमों, मापदंडों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया। अब इस मामले में राज्य सरकार के जवाब के बाद अगली सुनवाई में नियुक्तियों की वैधता पर महत्वपूर्ण फैसला आने की संभावना है।
