छत्तीसगढ़ में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं में विश्वसनीयता और डेटा गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) और भारत सरकार के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न शासकीय विभागों को ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023’ के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी अनुपालन और डेटा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
मयंक अग्रवाल
कार्यशाला को संबोधित करते हुए CHiPS के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मयंक अग्रवाल ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं का विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि DPDP अधिनियम केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में “Privacy by Design” और “Citizen-Centric Data Governance” की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘सेवा सेतु’ प्लेटफॉर्म का डिजिलॉकर, उमंग और माय स्कीम जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ सफल एकीकरण कर लिया है,होगा।
पारदर्शिता और साइबर
नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), नई दिल्ली के संचालक सुनील जैन ने कहा कि DPDP अधिनियम, 2023 सरकारी संस्थाओं के लिए डेटा प्रबंधन की नई और सख्त जवाबदेहियां तय करता है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के प्रभावी अनुपालन से न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि राज्य की साइबर सुरक्षा प्रणाली को भी मजबूत आधार मिलेगा। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक पी. रामाराव ने कहा कि डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साइबर अपराधियों के प्रमुख लक्ष्य होते हैं। इससे बचाव के लिए उन्होंने डेटा न्यूनतमकरण (Data Minimization), लॉग मॉनिटरिंग और नियमित सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य रूप से अपनाने की सलाह दी।विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियाँ
कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। NeGD के नितीश कालरा ने DPDP अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, डेटा फिड्यूशियरी की भूमिका, सहमति प्रबंधन और शिकायत निवारण प्रणाली पर प्रस्तुति दी। CHiPS के आशीष जायसवाल और NeGD के विशाल विरमानी ने डिजिलॉकर एकीकरण, सुरक्षित दस्तावेज़ साझाकरण और डिजिटल प्रमाण-पत्रों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। वहीं कीर्ति गुप्ता और महेश कुमार ने उमंग और माय स्कीम प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की रणनीतियों को साझा किया। कार्यशाला के समापन सत्र में CHiPS के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
