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पर्यावरण उल्लंघन पर जुर्माना मामला
पर्यावरण उल्लंघन पर जुर्माना मामला
रायपुर

ध्वनि प्रदूषण मामला :  DJ बजाने पर ₹1.05 करोड़ जुर्माने की मांग, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों के बाद पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई की जगह आर्थिक दण्ड लगाने की व्यवस्था की गई है। इसी उद्देश्य से अधिनियम में धारा 15C जोड़ी गई है, जिसके तहत केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) नियुक्त किए हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 12 Jul 2026, 07:02 PM · अपडेट: 06 Nov 2026, 08:55 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों के बाद पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई की जगह आर्थिक दण्ड लगाने की व्यवस्था की गई है। इसी उद्देश्य से अधिनियम में धारा 15C जोड़ी गई है, जिसके तहत केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) नियुक्त किए हैं। छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को निर्णायक अधिकारी बनाया गया है। 

उल्लंघन पर 10 हजार से 15 लाख जुर्माने  

रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि संशोधित धारा 15 के अनुसार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम या उससे जुड़े नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का आर्थिक दण्ड लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि उल्लंघन लगातार जारी रहता है तो हर दिन के हिसाब से अतिरिक्त जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। वहीं, यदि किसी सरकारी विभाग की ओर से नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित अधिकारी या विभागाध्यक्ष पर एक माह के वेतन के बराबर दण्ड लगाने की व्यवस्था भी कानून में मौजूद है। 

गणेश विसर्जन पर ध्वनि प्रदूषण का मामला

डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत रायपुर के शंकर नगर चौक में वर्ष 2023 में गणेश स्थापना और विसर्जन के दौरान ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया था। आरोप है कि अवंती विहार निवासी विक्की शदीजा ने नॉइज़ पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स का सात बार उल्लंघन किया। इस मामले में रायपुर निवासी संदीप तिवारी ने निर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में प्रत्येक उल्लंघन के लिए 15 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.05 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाने की मांग की गई थी।

तालाब सौंदर्यीकरण मामले शिकायत

डॉ. गुप्ता ने दूसरा मामला रायपुर के करबला तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य से जुड़ा बताया। इसमें वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इस मामले में भी निर्णायक अधिकारी के सामने शिकायत प्रस्तुत कर संबंधित जोन कमिश्नर पर एक माह के वेतन के बराबर दण्ड लगाने की मांग की गई थी। निर्णायक अधिकारी के फैसले को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती डॉ. गुप्ता के अनुसार, दोनों मामलों में निर्णायक अधिकारी ने शिकायतों के तथ्यों और गुण-दोष पर फैसला देने के बजाय यह कहते हुए प्रकरण खारिज कर दिए कि पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया अभी निर्धारित नहीं है। 

पेनल्टी प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद

डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि यह कहना उचित नहीं है कि पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 15 और 15C में दण्ड लगाने और शिकायतों के निपटारे की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा कि कानून में केवल यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर नियम बना सकती है, लेकिन ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि नियम बनने तक निर्णायक अधिकारी अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

पर्यावरण कानून के प्रभावी पालन सवाल

डॉ. गुप्ता ने कहा कि यदि यह मान लिया जाए कि प्रक्रिया तय नहीं होने के कारण पर्यावरणीय उल्लंघनों पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता, तो इससे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य कमजोर हो जाएगा।
उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई करना मुश्किल होगा और कानून का निवारक प्रभाव भी खत्म हो सकता है। देश में पहली बार सामने आए ऐसे मामले डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में आर्थिक दण्ड की नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये देश के पहले ऐसे मामले हैं, जिनमें इस प्रावधान के तहत शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं। 
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