छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल को चुनावी मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग नामंजूर कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर होगी। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 23 जून को तय की गई है।
चुनाव रद्द करने की मांग
मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। पाटन सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे और वर्तमान दुर्ग सांसद विजय बघेल ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदान से ठीक पहले, जब चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लागू हो चुका था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पाटन क्षेत्र में समर्थकों के साथ रोड शो और रैली निकाली। इस दौरान चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से समर्थन मांगा गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-126 का उल्लंघन है।
भूपेश बघेल ने कहा- याचिका में ठोस साक्ष्य नहीं
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से अदालत में विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराई गईं। उनके वकीलों ने 16 अलग-अलग बिंदुओं पर तर्क रखते हुए कहा कि चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। याचिकाकर्ता आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन उनके समर्थन में कोई प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि याचिका को शुरुआती चरण में ही निरस्त कर दिया जाए। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और माना कि मामले में सुनवाई के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है विवाद
इस चुनावी विवाद में कानूनी लड़ाई पहले भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। हाईकोर्ट से एक अन्य आवेदन खारिज होने के बाद भूपेश बघेल ने Supreme Court of India में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट में याचिका की मेंटेनेबिलिटी को लेकर नया आवेदन पेश करने की छूट दी थी। उसी आदेश के बाद दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब इसे भी खारिज कर दिया है।
अब क्या होगा
मामले की सुनवाई Justice Ravindra Kumar Agrawal की एकलपीठ में चल रही है। अदालत अब इस बात की जांच करेगी कि चुनाव आचार संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन के आरोपों में कितना दम है और याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य कितने मजबूत हैं। यदि सुनवाई के दौरान आरोप सिद्ध होते हैं तो मामला भूपेश बघेल के निर्वाचन की वैधता तक पहुंच सकता है। हालांकि फिलहाल अदालत ने केवल याचिका को सुनवाई योग्य माना है, आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।
