पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के लड़ाकू विमानों की रेस में रूस ने एक बड़ा कदम उठाया है। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के सीईओ वादिम बडेखा ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि रूस के दूसरे स्टील्थ लड़ाकू विमान, Su-75 'चेकमेट' (Checkmate) के पहले फ्लाइंग प्रोटोटाइप (उड़ान भरने वाले मॉडल) पर काम शुरू हो चुका है।
वर्ष 2021 में पहली बार दुनिया के सामने पेश किए गए इस विमान का भविष्य लंबे समय से अधर में दिख रहा था, लेकिन प्रोटोटाइप निर्माण की इस खबर ने रक्षा विशेषज्ञों को दोबारा चौंका दिया है। फैक्टरी में इसके पुर्जों और एडवांस सेंसरों का परीक्षण शुरू किया जा चुका है और माना जा रहा है कि यह विमान जल्द ही अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट के लिए रनवे पर उतरेगा।
देरी से चल रहा है प्रोजेक्ट, बदलेगा मूल डिजाइन!
यह विमान अपनी तय टाइमलाइन से काफी पीछे चल रहा है। 2021 के अनुमानों के मुताबिक, इसे 2023 तक उड़ान भर लेनी थी और 2026 तक सेना में शामिल हो जाना था। हालांकि, इस देरी का एक फायदा भी हुआ है।
रूस ने अपने पहले भारी स्टील्थ फाइटर Su-57 को विकसित करने और यूक्रेन युद्ध के अनुभवों से जो तकनीकी तरक्की हासिल की है, उसे अब Su-75 में ढाला जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब बनने वाला वास्तविक विमान 2021 में दिखाए गए शुरुआती मॉकअप (मॉडल) से काफी अलग और कहीं अधिक घातक होगा। यहां तक कि 'चेकमेट' नाम को भी बदला जा सकता है, क्योंकि यह सिर्फ शुरुआती मार्केटिंग के लिए रखा गया था।
क्यों खास है Su-75 चेकमेट?
अमेरिकी F-35 और चीनी J-20 को टक्कर देने के लिए बनाए जा रहे इस लड़ाकू विमान की खूबियां इसे दुनिया के अन्य विमानों से अलग बनाती हैं:
हल्का और फुर्तीला सिंगल-इंजन: रूस के पास पहले से दोहरे इंजन वाला भारी Su-57 मौजूद है। Su-75 को सिंगल-इंजन के साथ 'हाई-लो' कॉम्बिनेशन (जैसे अमेरिका का F-15 और F-16 कॉम्बिनेशन) के तहत तैयार किया जा रहा है, जिससे यह हल्का और बेहद फुर्तीला है।
AI को-पायलट असिस्टेंस: इसमें ओपन-आर्किटेक्चर इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पायलट असिस्टेंस दी गई है, जो युद्ध के समय एक डिजिटल को-पायलट की तरह काम करेगी।
साझा तकनीक, कम लागत: इसमें Su-57 वाले इंजन, कंपोजिट मटीरियल, हथियार और एवियोनिक्स सूट के छोटे रूप का इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसके विकास की लागत को नियंत्रित रखा जा सके।
हैरान करने वाली कीमत: इस विमान की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी कीमत है। इसके 25 से 30 मिलियन डॉलर के करीब होने की उम्मीद है, यानी अमेरिका का F-35 इससे करीब तीन गुना ज्यादा महंगा है।
बजट संकट और एक्सपोर्ट मार्केट की चुनौती
रूस के Su-57 प्रोग्राम को नवंबर 2025 में अपनी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट डिलीवरी पक्की होने से संजीवनी मिल चुकी है, लेकिन छोटे Su-75 का भविष्य अभी भी विदेशी खरीदारों पर टिका है।
विशेषज्ञों की चिंता: ज्यादातर देश Su-57 को ज्यादा प्राथमिकता दे सकते हैं क्योंकि महंगे होने के बावजूद उसकी रेंज (उड़ने की दूरी) और युद्धक क्षमता कहीं बेहतर है। अगर Su-75 को बड़े विदेशी ऑर्डर नहीं मिलते हैं, तो प्रोजेक्ट के बजट पर संकट आ सकता है। हालांकि, कम रक्षा बजट वाले देशों के लिए यह एक बेहतरीन 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।
क्या भारत बनेगा इस प्रोजेक्ट का मुख्य आधार?
रूस ने भारत को इस विमान की सीधे तौर पर पेशकश की है। रूस चाहता है कि भारत इस प्रोजेक्ट में सिर्फ एक खरीदार न बनकर बल्कि एक सक्रिय भागीदार (Partner) बने, जिसके तहत भारत में ही 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर' (तकनीक हस्तांतरण) के साथ इसका 100% स्थानीय निर्माण किया जा सके।
भारत के लिए यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है:
| पहलू | विवरण |
| HAL की हरी झंडी | फरवरी 2026 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के एक अधिकारी ने रूसी एजेंसी TASS को बताया कि भारत रूस के साथ नए लड़ाकू विमान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। |
| पुराना भरोसा | HAL का रूसी कंपनियों के साथ काम करने का लंबा और सफल ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। भारत में MiG-21, MiG-27 और Su-30MKI जैसे बेहतरीन विमानों को स्थानीय स्तर पर असेंबल और निर्मित किया गया है। |
| संभावित खरीदार | यदि यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो भारत के अलावा उत्तर कोरिया और कजाकिस्तान भी इसके मुख्य खरीदारों की रेस में सबसे आगे हैं। |
