समंदर के सिकंदर : उफनती लहरों के बीच भारतीय तटरक्षक बल ने बचाई देश की वैज्ञानिक आंख
भारतीय तटरक्षक बल ने बंगाल की खाड़ी में अपनी तय जगह से 150 किलोमीटर दूर बह गए वैज्ञानिक डेटा बॉय को सफलतापूर्वक सुरक्षित बरामद किया। यह उपकरण मौसम पूर्वानुमान, समुद्री अनुसंधान और आपदा प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पहले तटरक्षक बल ने 90 मिनट के रेस्क्यू ऑपरेशन में छह मछुआरों की जान भी बचाई थी।
भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने समंदर के सीने पर एक बार फिर अपनी बहादुरी और सूझबूझ का लोहा मनवाया है। बंगाल की खाड़ी में आए भयंकर उफान के बीच तटरक्षक बल के जांबाजों ने एक बेहद जटिल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए देश की बहुमूल्य वैज्ञानिक 'डेटा बॉय' (Scientific Data Buoy) को सुरक्षित ढूंढ निकाला है।
यह उपकरण आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट पर अपनी तय जगह से करीब 150 किलोमीटर दूर बह गया था, जिसे खोने का मतलब था मौसम और समंदर से जुड़े करोड़ों के डेटा का नुकसान। यह कामयाबी जितनी बड़ी है, इसका ऑपरेशन उतना ही चुनौतीपूर्ण था। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और एनआईओटी (MoES-NIOT) की यह वैज्ञानिक डेटा बॉय समंदर में रास्ता भटककर लापता हो गई थी।
सटीक नेविगेशन सहारे खोजा उपकरण
तेज हवाओं और ऊंची उठती लहरों के बीच तटरक्षक बल के अत्याधुनिक जहाज 'रानी गैदिन्लियू' को मोर्चे पर उतारा गया। कप्तानों और क्रू ने सटीक नेविगेशन और जांबाजी का परिचय देते हुए इस भारी-भरकम उपकरण को उफनते समंदर के बीच से न सिर्फ खोजा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित अपने नियंत्रण में ले लिया। यह डेटा बॉय समंदर की लहरों की रफ्तार, पानी का तापमान, समुद्री धाराओं की दिशा और पल-पल बदलते मौसम का सटीक वैज्ञानिक आंकड़ा जुटाती है।
उपरकरणों की सुरक्षा करना जिम्मेदारी
इसी डेटा के दम पर मौसम विभाग चक्रवात (Cyclone) की भविष्यवाणी करता है, तटीय सुरक्षा के खाके खींचे जाते हैं और आपदा प्रबंधन की टीमें अलर्ट होती हैं। अगर यह गायब हो जाती, तो समुद्री अनुसंधान को बड़ा झटका लगता। तटरक्षक बल ने इस कामयाबी पर कहा कि उनका काम सिर्फ समुद्री सीमाओं की सुरक्षा या बचाव अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के वैज्ञानिक हितों और रिसर्च उपकरणों की सुरक्षा करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
छह लोगों की जिंदगियों को बचाया
तटरक्षक बल की मुस्तैदी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे ठीक एक हफ्ते पहले समंदर में आए एक और तूफान के बीच इन जांबाजों ने छह इंसानी जिंदगियों को डूबने से बचाया था। मामला कर्नाटक के मंगलूरु तट का है, जहां 29 जून की शाम को ‘मंजू माथा’ नाम की एक भारतीय मछली पकड़ने वाली नौका गहरे समंदर में फंस गई थी। सुरथकल तट से करीब 33 समुद्री मील दूर, इस नाव का ढांचा लहरों के थपेड़ों से टूट गया था और उसमें तेजी से पानी भरने लगा था। नाव पर सवार 6 मछुआरों की सांसें अटक चुकी थीं और चारों तरफ सिर्फ मौत का मंजर था।
सिर्फ 90 मिनट में पलट दी बाजी
जैसे ही तटरक्षक बल के कंट्रोल रूम को संकट का संदेश मिला, बिना एक पल गंवाए रेस्क्यू शिप को आपदा की ओर मोड़ दिया गया। महज 90 मिनट के भीतर तटरक्षक बल की टीम मौके पर पहुंच गई।
चुनौती: समंदर में रात का घुप्प अंधेरा, बेहद कम विजिबिलिटी (दृश्यता) और नाव को डुबाने पर आमादा ऊंची लहरें।
एक्शन: जवानों ने घबराने के बजाय धैर्य से काम लिया। समंदर में विशेष 'रिमोट कंट्रोल लाइफबॉय' उतारे गए।
नतीजा: लहरों से जूझते हुए जांबाजों ने एक-एक कर सभी छह मछुआरों को सुरक्षित खींच लिया और उन्हें नई जिंदगी दी।
भारतीय तटरक्षक बल का यह दोहरा पराक्रम दिखाता है कि समंदर में चाहे देश की संपत्ति पर आंच आए या किसी नागरिक की जान पर, संकट के समय 'रक्षक' हमेशा मुस्तैद हैं।