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कथा के दौरान साध्वी राधा किशोरी
कथा के दौरान साध्वी राधा किशोरी
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भक्ति की धारा : साध्वी राधिका किशोरी ने बसना के श्रद्धालुओं को बताया मोक्ष का मार्ग

बसना के सना नगर स्थित मंडी प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। गायत्री मंदिर से निकली यात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने कलश धारण कर भाग लिया। श्रीमद् भागवतकथा की प्रख्यात विश्लेषक कथा मर्मज्ञ साध्वी राधिका किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए इसे मोक्ष का मार्ग बताया।

कीर्तिमान न्यूज
08 Jun 2026, 10:56 AM
महासमुंद
बसना नगर के मंडी प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में हुआ। यह धार्मिक आयोजन 7 जून से 13 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। आयोजन देवसरिया परिवार बसना, मित्तल परिवार सरायपाली, मित्तल परिवार उमरिया एवं तुषरा परिवार के तत्वावधान में किया जा रहा है। 
कथा के प्रथम दिवस प्रातः काल गायत्री मंदिर से कथा स्थल मंडी प्रांगण तक भव्य एवं मंगलमय कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। भगवान के जयघोष, भजन-कीर्तन और भगवान राधेकृष्ण नारों से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। 

भगवान के प्रति समर्पण 

कथा व्यास पीठ से श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी राधिका किशोरी जी ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस कथा श्रवण के महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ की कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, भक्ति और मोक्ष के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य साधना है। यह कथा भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को जागृत करती है तथा मनुष्य को सांसारिक विकारों से मुक्त होने की प्रेरणा देती है। 

श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन का वर्णन 

साध्वी राधिका किशोरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा की महिमा इतनी महान है कि इसके श्रवण के लिए स्वयं देवता अमृत कलश लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इस सनातन ग्रंथ में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्र और जीवन दर्शन का वर्णन है। कथा के श्रवण हेतु 88 हजार शौनकादि ऋषि ब्रह्माजी के पास पहुंचे थे और उन्होंने ऐसा स्थान बताने का आग्रह किया था जहां पूर्ण शांति के साथ कथा का आयोजन किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि भगवान के निर्देशानुसार जहां सुदर्शन चक्र गिरा, वही स्थान कथा श्रवण के लिए चुना गया और वह स्थान उत्तर प्रदेश का पावन नैमिषारण्य बना। 

जयघोषों से गूंजता रहा पंडाल

वहीं पर महर्षि शुकदेव जी ने तक्षक के श्राप से पीड़ित राजा परीक्षित को सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया था, जिसके प्रभाव से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। यह प्रसंग श्रीमद्भागवत कथा की दिव्यता और महिमा को सिद्ध करता है। कथा के दौरान श्री राधे-राधे और श्री राधाकृष्ण के जयघोषों से पूरा पंडाल गूंजता रहा। भक्ति संगीत और मधुर भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया।

आम लोगों से की अपील 

प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति ने नगर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने और आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की है। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत यह आयोजन पूरे क्षेत्र में धार्मिक जागरण का केंद्र बना हुआ है।
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