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दिल्ली-यूपी से 7 आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली-यूपी से 7 आरोपी गिरफ्तार
कोंडागांव

पुलिस का खुलासा : बीमा पॉलिसी के नाम पर 29 लाख की साइबर ठगी, दिल्ली-यूपी से 7 आरोपी गिरफ्तार

फरसगांव पुलिस ने बीमा पॉलिसी और फंड रिलीज के नाम पर 29 लाख 69 हजार रुपए की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। तीन महीने की तकनीकी जांच के बाद दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तरप्रदेश से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी फर्जी बीमा एजेंट बनकर लोगों को प्रोसेसिंग फीस और इंश्योरेंस राशि के नाम पर ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन की मदद से गिरोह तक पहुंच बनाई।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
19 May 2026, 04:08 PM
📍 कोंडागांव

कोंडागांव जिले के फरसगांव थाना पुलिस ने बीमा पॉलिसी और फंड रिलीज के नाम पर लाखों रुपए की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी जांच और लगातार ट्रैकिंग के बाद पुलिस ने दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तरप्रदेश से सात शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद दिल्ली से लेकर गाजियाबाद तक फैले साइबर ठगी नेटवर्क की कई परतें खुल गई हैं। मामले की शुरुआत 27 नवंबर 2025 को हुई, जब फरियादी शंकरलाल राणा (57 वर्ष), निवासी कोपरा बाजारपारा फरसगांव, को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बीमा लोकपाल परिषद (बी.ओ.सी.ओ.) का एजेंट बताते हुए कहा कि उनका बीएसई स्टॉक एक्सचेंज में फंसा 7 लाख 17 हजार 299 रुपए का फंड रिलीज होना है। इसके लिए पहले प्रोसेसिंग फीस जमा कराने की बात कही गई।

इसके बाद गिरोह के सदस्यों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से खुद को शिव शंकर पाण्डेय, एम.के. बजाज, साक्षी शर्मा, बृज मोहन पाण्डेय और दीपक सिंह बताकर फरियादी से लगातार संपर्क बनाए रखा। आरोपियों ने भरोसा जीतकर प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस राशि और फंड रिलीज के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल 29 लाख 69 हजार 673 रुपए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

ठगी का एहसास होते ही दर्ज हुआ मामला

जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब उसने थाना फरसगांव में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 29/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड पहले लोगों को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर बैंक खाते से लिंक कराने के बहाने जाल में फंसाता था। इसके बाद खातों की जानकारी हासिल कर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता था। आरोपी फर्जी एजेंट बनकर पहले भरोसा जीतते और फिर रकम ट्रांसफर करवा लेते थे।

पुलिस से बचने के लिए बदलते थे मोबाइल नंबर

साइबर अपराधी लगातार मोबाइल नंबर बदलते थे और कीपैड फोन का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस आसानी से ट्रैक न कर सके। सामान्य मोबाइल फोन केवल रिश्तेदारों से बातचीत के लिए उपयोग किए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का मुख्य आरोपी राजा पहले भी दो बार साइबर अपराध के मामलों में जेल जा चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा और प्रभारी पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीमाल के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा और एसडीओपी अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में टीम ने तीन महीने तक बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया।

दिल्ली पहुंचते ही अंडरग्राउंड हुआ गिरोह, फिर भी नहीं बच सके आरोपी

जैसे ही छत्तीसगढ़ पुलिस दिल्ली पहुंची, आरोपियों को भनक लग गई और पूरा गिरोह अंडरग्राउंड हो गया। हालांकि पुलिस टीम ने लगातार लोकेशन ट्रैकिंग, बैंक डिटेल और डिजिटल नेटवर्क के आधार पर दबिश जारी रखी और आखिरकार सात आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। गिरफ्तार आरोपियों में इसरार अहमद, आकिल, शिवम गुप्ता, नितिन कुमार त्यागी, राजा हुसैन, तरुण कौशिक और प्रदीप बघेल शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को दिल्ली और उत्तरप्रदेश से ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाकर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। फरसगांव पुलिस के अनुसार, यह पहला मामला है जिसमें साइबर ठगी गिरोह के मुख्य साजिशकर्ता और मेन कॉलर तक पहुंच बनाई गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा अन्य राज्यों में सक्रिय नेटवर्क की जानकारी भी सामने आने की संभावना है।

पुलिस टीम की भूमिका रही अहम

इस पूरी कार्रवाई में एसडीओपी अभिनव उपाध्याय, निरीक्षक राजकुमार सोरी, उप निरीक्षक शशिभूषण पटेल, प्रधान आरक्षक अजय बघेल, रामकुमार ठाकुर, लक्ष्मीनारायण शोरी, महिला आरक्षक सरस्वती यादव और साइबर टीम के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, फंड रिलीज, इंश्योरेंस बोनस या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें। मोबाइल पर आने वाले ऐसे कॉल अब साइबर ठगी का बड़ा माध्यम बन चुके हैं और एक छोटी सी लापरवाही जीवनभर की कमाई डुबो सकती है।

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