इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांच के बीच दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक ऐसे हाईटेक साम्राज्य का खात्मा किया है, जो किसी मल्टीनेशनल कंपनी की तर्ज पर चलाया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड कुणाल वर्मा सहित कुल 13 आरोपियों को दबोचा है। यह गिरोह हैदराबाद से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था और करोड़ों रुपयों का हेरफेर कर रहा था।
कंपनी की तरह भर्ती और 'कस्टमर केयर' की सुविधा
इस गिरोह की कार्यप्रणाली देख पुलिस भी हैरान रह गई। मास्टरमाइंड कुणाल वर्मा ने सट्टे के कारोबार को एक व्यवस्थित कंपनी का रूप दे रखा था:
सैलरी पर कर्मचारी: आरोपियों ने कैशियर, अकाउंटेंट और हिसाब-किताब रखने वालों को बाकायदा मासिक वेतन पर रखा था।
24x7 हेल्पडेस्क: सट्टा लगाने वालों की समस्याओं और तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए 'कस्टमर सपोर्ट' की टीम शिफ्टों में काम करती थी।
ट्रेनिंग और टारगेट: कर्मचारियों को बैंक खातों के प्रबंधन और कैश फ्लो को बनाए रखने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी।
लोटस ऐप और दो पैनलों से करोड़ों का दांव
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह "लोटस" (Lotus) नामक सट्टा ऐप और दो अलग-अलग ऑनलाइन पैनलों के जरिए आईपीएल मैचों पर दांव लगवा रहा था। जैसे ही आईपीएल 2026 का सीजन शुरू हुआ, यह गिरोह हैदराबाद के एक किराए के फ्लैट में शिफ्ट हो गया ताकि स्थानीय पुलिस की नजरों से बच सके। अब तक की जांच में करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है।
गरीबों के खातों का इस्तेमाल
इस सिंडिकेट का सबसे काला पक्ष यह है कि सट्टे की रकम को सफेद करने के लिए स्लम एरिया के जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाया जाता था।
जावेद अख्तर और आभास जायसवाल (जिन्हें 16 मई को पकड़ा गया) लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे।
एक खाते के बदले गरीब व्यक्ति को ₹25,000 तक दिए जाते थे।
इसके बाद उस खाते की सिम, एटीएम और चेकबुक मास्टरमाइंड कुणाल तक पहुंचा दी जाती थी।
बरामदगी और कानूनी कार्रवाई
दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध (Organized Crime) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।जब्ती: 9 लैपटॉप, 46 मोबाइल फोन, 107 एटीएम कार्ड, 23 बैंक पासबुक और ₹2.57 लाख कैश।
साइबर कनेक्शन: जिन बैंक खातों का उपयोग हो रहा था, उनमें पहले से ही 63 साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज मिली हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की सूची
पुलिस ने भिलाई और भोपाल से जुड़े 13 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है:
कुणाल वर्मा (मास्टरमाइंड - भिलाई)
विक्की कुमार साहू (दुर्ग)
अभिषेक भारती (भिलाई)
गुफरान खान (भोपाल)
राजकुमार पासवान (भिलाई)
तुकेश्वर साहू (भिलाई)
जेदखान (भोपाल)
के. श्रीनु (भिलाई)
शेख सद्दाम (भिलाई)
विकास राय (भिलाई)
विकास निषाद (भिलाई)
रोहित चौहान (भिलाई)
प्रतीक पटेल (भिलाई)
"हम इस नेटवर्क की गहराई तक जा रहे हैं। कुणाल वर्मा के ऊपर बैठे बड़े पैनल सप्लायरों और सट्टे की कमाई से बनाई गई संपत्तियों की जांच जारी है। म्यूल अकाउंट (किराये के खाते) देने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा।" > — विजय अग्रवाल, एसएसपी दुर्ग
अलर्ट: आईपीएल सीजन में पुलिस अब तक 14 बड़ी कार्रवाइयां कर चुकी है। जनता से अपील है कि वे चंद रुपयों के लालच में आकर अपने बैंक खाते किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें।

