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ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार
ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार
दुर्ग संभाग

लोन के नाम पर ठगी : आंगनबाड़ी केंद्र को बनाया ठिकाना, साइबर फ्रॉड और सट्टेबाजी के लिए खोल रहे थे म्यूल अकाउंट, 2 गिरफ्तार

Bhilai के छावनी इलाके में पुलिस ने लोन दिलाने के नाम पर गरीब लोगों के बैंक खाते और दस्तावेज हड़पने वाले एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा किया है। आरोपी इन खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में साइबर अपराधियों और ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को बेचते थे। पुलिस ने Akash Jaiswal और Javed Akhtar को गिरफ्तार कर पासबुक, बैंक दस्तावेज और मोबाइल जब्त किए हैं। मामले में कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच जारी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 18 May 2026, 10:23 AM · अपडेट: 27 Oct 2026, 10:13 PM
भिलाई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के भिलाई से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आम लोगों को जाल में फंसाकर उनके नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। भिलाई के छावनी इलाके में लोन दिलाने का झांसा देकर गरीब और मासूम लोगों के बैंक खाते, पासबुक और जरूरी दस्तावेज हड़पने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस काले कारोबार में शामिल दो मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।

पकड़े गए आरोपी इन बैंक खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' (Mule Accounts) के रूप में कर रहे थे, जिसका सीधा कनेक्शन देशव्यापी साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी से जुड़ा हुआ है।

यह पूरा खेल थाना छावनी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बैकुण्ठ धाम आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-25 परिसर में चल रहा था। आरोपियों ने इस सरकारी परिसर को अपना ठिकाना बनाया ताकि लोगों को उन पर शक न हो। वे आसपास के सीधे-साधे लोगों को जल्द से जल्द और आसान किश्तों पर लोन दिलाने का लालच देते थे। लोन पास कराने के बहाने वे लोगों से उनके ओरिजिनल बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक और आधार-पैन जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा करवा लेते थे।

16 मई को पुलिस की 'सर्जिकल स्ट्राइक'

छावनी पुलिस को 16 मई को मुखबिर से पक्की सूचना मिली कि बैकुण्ठ धाम परिसर में कुछ संदिग्ध युवक लोगों के दस्तावेज इकट्ठा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके पर छापेमारी (रेड) कर दी।

पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से दो आरोपियों को दबोच लिया, जिनकी पहचान इस प्रकार हुई है:

  1. आकाश जायसवाल (निवासी: शारदा पारा, कैंप-02, भिलाई)

  2. जावेद अख्तर (निवासी: मदर टेरेसा नगर, कैंप-01, भिलाई)

'म्यूल अकाउंट' का खेल: मोटी रकम लेकर बेचते थे खाते

पुलिसिया पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपियों ने कबूल किया कि वे लोगों से 'लोन' के नाम पर खाते खुलवाते या उनकी पासबुक लेते थे। इसके बाद, इन खातों को वे खुद इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि मोटी रकम (कमीशन) लेकर बड़े साइबर अपराधियों और ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले सिंडिकेट को बेच देते थे।

क्या होता है म्यूल अकाउंट (Mule Account)? साइबर ठग या सटोरिये पुलिस से बचने के लिए अपने खुद के बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते। वे आम और गरीब लोगों के खातों को किराए पर लेते हैं या खरीद लेते हैं। जब किसी से साइबर ठगी होती है, तो वो पैसा इन्हीं 'म्यूल अकाउंट्स' में आता है और फिर वहां से कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर निकाल लिया जाता है। इससे असली अपराधी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

महाराजा बैंक के दस्तावेज और मोबाइल जब्त

पुलिस ने जब आरोपियों की तलाशी ली, तो उनके पास से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्रियां बरामद हुईं:

  • महाराजा बैंक से संबंधित कई बैंक खातों के दस्तावेज और पासबुक।

  • ठगी और सिंडिकेट से संपर्क के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वीवो (Vivo) कंपनी का स्मार्टफोन।

अब खंगाली जा रही है 'कॉल डिटेल'

छावनी पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें न्यायिक रिमांड (जेल) पर भेज दिया है।

आगे की जांच: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ दो आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस अब जब्त किए गए मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR), व्हाट्सएप चैट्स और बरामद बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि इस रैकेट के तार अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं और जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

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