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Case of cyber fraud (Image Source: AI Photo)
Case of cyber fraud (Image Source: AI Photo)
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Cyber Fraud: 39 मिनट में पांच बार ट्रांजेक्शन, क्रेडिट कार्ड से पार हुए 1.96 लाख, साइबर ठगों के नए पैंतरे से हड़कंप

Cyber Fraud: रायपुर के नवा रायपुर में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने एक सरकारी कर्मचारी के SBI क्रेडिट कार्ड से महज 39 मिनट में पांच ट्रांजेक्शन कर 1,96,286 रुपये निकाल लिए। पीड़ित की शिकायत पर राखी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 07 Nov 2026, 01:28 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Cyber Fraud: साइबर ठग अब सिर्फ बैंक खातों में सेंध लगाकर ही नहीं रुक रहे, बल्कि लोगों के क्रेडिट कार्ड को भी अपना आसान निशाना बना रहे हैं। राजधानी रायपुर से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शातिर साइबर अपराधियों ने महज़ 39 मिनट के भीतर एक सरकारी कर्मचारी के क्रेडिट कार्ड से पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर 1.96 लाख रुपये उड़ा लिए। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी और जब तक उसे इस बड़े फ्रॉड का पता चलता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सेक्टर-27 का है मामला, इंद्रावती भवन में कार्यरत हैं पीड़ित 

यह पूरी घटना राखी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नवा रायपुर के सेक्टर-27 की है। यहां रहने वाले पावेश कंवर (28) इंद्रावती भवन स्थित संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं में सहायक ग्रेड-2 के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके एसबीआई (SBI) क्रेडिट कार्ड को ठगों ने निशाना बनाया। यह वारदात 28 अक्टूबर की शाम 5:20 बजे से लेकर 5:59 बजे के बीच अंजाम दी गई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और गहराई से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।

39 मिनट में ताबड़तोड़ पांच ट्रांजेक्शन

मामले की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि ठगों ने शातिराना अंदाज में एक ही झटके में पूरी रकम निकालने के बजाय, चंद मिनटों के अंतराल पर पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए।

  • शाम 5:20 बजे: सबसे पहले 6,000 रुपये निकाले गए।

  • इसके बाद: 41,049 रुपये और 37,309 रुपये के ट्रांजेक्शन हुए।

  • फिर: एक बार फिर 37,309 रुपये की निकासी की गई।

  • अंत में (शाम 5:59 बजे): सबसे बड़ा ट्रांजेक्शन 74,619 रुपये का किया गया।

इस तरह कुल 1,96,286 रुपये की बड़ी रकम कार्ड से साफ हो गई। इन लगातार भुगतानों से साफ जाहिर होता है कि ठगों ने सुनियोजित तरीके से कार्ड की उपलब्ध क्रेडिट सीमा (Limit) का पूरा फायदा उठाते हुए अधिकतम रकम ऐंठने की कोशिश की। पीड़ित पावेश का कहना है कि उन्होंने इन भुगतानों के लिए न तो कोई अनुमति दी थी और न ही खुद कभी कोई ऐसी ऑनलाइन शॉपिंग या ट्रांजेक्शन किया था।

ओटीपी (OTP) या मैसेज की नहीं मिली जानकारी 

सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि पावेश कंवर को इस दौरान किसी भी तरह का ओटीपी या अलर्ट मैसेज समय पर नहीं मिला। जब उनके पास पैसों के कटने की जानकारी पहुंची, तब तक सारे पांचों ट्रांजेक्शन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके थे। हालात भांपते हुए उन्होंने बिना देर किए तुरंत बैंक और स्थानीय पुलिस को इस फ्रॉड की सूचना दी। शुरुआती जांच-पड़ताल में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि क्रेडिट कार्ड का गोपनीय डेटा या तो किसी डेटा लीक का शिकार हुआ है, या फिर किसी फर्जी वेबसाइट या अनजान फिशिंग लिंक के जरिए ठगों के हाथ लग गया है।

चार मोबाइल नंबरों और आईपी एड्रेस की तलाश में जुटी पुलिस 

पीड़ित द्वारा दी गई शिकायत में चार संदिग्ध मोबाइल नंबरों का जिक्र किया गया है। अब पुलिस इन्हीं नंबरों के मालिकों, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल पेमेंट्स के तमाम रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुटी है। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि आखिर कार्ड की डिटेल्स लीक कैसे हुईं और यह सारा पैसा आखिर किन बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर हुआ है। साइबर सेल की तकनीकी टीम की मदद से ट्रांजेक्शन से जुड़े आईपी (IP) एड्रेस और मर्चेंट की डिटेल भी निकाली जा रही है। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने एक बार फिर आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड की गोपनीय जानकारी, सीवीवी (CVV), ओटीपी या किसी भी अनजान लिंक को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें और किसी के साथ साझा न करें।

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