Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मंदिर हसौद इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन बेचने का सौदा करने के बाद खरीदार से 35 लाख रुपए से अधिक की रकम ले ली गई, लेकिन जब रजिस्ट्री कराने का समय आया तो जमीन मालिक गायब हो गया। इस बीच उसकी पत्नी ने थाने में पति की गुमशुदगी दर्ज करा दी।
न्यू राजेंद्र नगर निवासी रजनीकांत सिंह के मुताबिक, ग्राम मुनरेठी के कोटवार रोहित रविदास के जरिए उनकी मुलाकात जमीन मालिक करण मन्नाडे से हुई थी। करण अपनी कृषि भूमि का कुछ हिस्सा बेचना चाहता था। जमीन देखने के बाद दोनों के बीच 790 रुपए प्रति वर्गफुट की दर से सौदा तय हुआ। इसके बाद 14 अक्टूबर 2024 को करीब 6780 वर्गफुट जमीन के लिए विक्रय अनुबंध किया गया।
दस्तावेज और जमीन की नाप के नाम पर लेते रहे पैसे
शिकायतकर्ता का आरोप है कि तय समय में रजिस्ट्री कराने के बजाय करण अलग-अलग कारण बताकर उससे रकम मांगता रहा। कभी जमीन के दस्तावेज तैयार कराने तो कभी नाप कराने और अन्य जरूरतों का हवाला देकर पैसे लिए गए। खरीदार के अनुसार, 11 जून 2025 तक वह कुल 35 लाख 1 हजार 240 रुपए दे चुका था। इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
पत्नी ने पति के लापता होने की दी थी जानकारी
करण से संपर्क नहीं होने पर खरीदार ने जमीन के संबंध में उसकी पत्नी रूखमणी मन्नाडे से जानकारी ली। इस दौरान पत्नी ने बताया कि उसका पति बिना किसी को कुछ बताए घर से चला गया है। उसने 14 जुलाई 2025 को मंदिर हसौद थाने में पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। रूखमणी ने कोटवार के माध्यम से खरीदार को भरोसा दिलाया कि पति के वापस आने पर जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी।गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद पत्नी के नाम कर दी जमीन
बाद में रजनीकांत सिंह ने राजस्व अभिलेखों की जानकारी जुटाई तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई। दस्तावेजों के मुताबिक, 6 अगस्त 2025 को करण मन्नाडे ने अपनी पत्नी रूखमणी के नाम दान विलेख के जरिए इकरारनामा वाली जमीन समेत अपनी अन्य जमीन भी हस्तांतरित कर दी थी। पुलिस ने करण को 5 दिसंबर 2025 को दस्तयाब किया था।
BNS की धाराओं में पति-पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज
शिकायत की जांच के बाद मंदिर हसौद पुलिस ने करण मन्नाडे और रूखमणी मन्नाडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत 6 नवंबर 2026 को अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। अब जमीन के विक्रय अनुबंध, खरीदार की ओर से किए गए भुगतान के साक्ष्य और दान विलेख से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।












