CG Health Department: राजधानी रायपुर के लक्ष्मी नगर स्थित एसके केयर हॉस्पिटल पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले की जांच के बाद संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एवं छत्तीसगढ़ राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल का पंजीयन एक साल के लिए निरस्त कर दिया है। इस अवधि में अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती नहीं कर सकेगा। साथ ही अस्पताल परिसर से योजना से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मरीजों से दवाइयों के नाम पर अतिरिक्त वसूली
जांच में पाया गया कि आयुष्मान योजना के तहत भर्ती मरीजों से दवाइयों और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्रियों के लिए अलग से नकद राशि ली गई थी। शशि नायक और पुष्पा पटेल के मामलों में मरीजों से अतिरिक्त पैसे लेने की बात सामने आई। जबकि योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र लाभार्थियों को निर्धारित उपचार की सुविधा बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कॉर्ड में डॉक्टरों की संख्या और वास्तविक स्थिति में अंतर
अस्पताल के पंजीयन और एम्पेनमेंट से जुड़े दस्तावेजों में 22 चिकित्सकों की जानकारी दर्ज थी। हालांकि, औचक निरीक्षण के दौरान मौके पर केवल तीन एमबीबीएस डॉक्टर ही मौजूद मिले। जांच दल ने इसे अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और प्रस्तुत रिकॉर्ड के बीच गंभीर अंतर माना।मरीजों के इलाज में महंगे पैकेज बुक करने का मामला
जांच में यह भी सामने आया कि एक्यूट किडनी इंजरी (AKI), एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों के मामलों में अपेक्षाकृत अधिक कीमत वाले उपचार पैकेज बुक किए गए थे। इसके अलावा डिस्चार्ज हो चुके मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड का टीएमएस में अपलोड दस्तावेजों से मिलान किया गया। फार्मेसी और लैब रिकॉर्ड की जांच में संबंधित दवाइयों और जांचों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले।
एजेंट के जरिए मरीज लाने और गलत पैकेज दर्ज करने का आरोप
जांच के दौरान एक लाभार्थी ने बताया कि वह निर्मल यादव नामक एजेंट के माध्यम से अस्पताल पहुंचा था और इसके लिए अतिरिक्त राशि भी दी थी। मरीज को फिस्टुला का इलाज कराना था, लेकिन आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में उसके नाम पर निमोनिया का पैकेज बुक किया गया। जांच एजेंसी ने इस मामले को योजना के संभावित दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना।अस्पताल ने अपने जवाब में क्या कहा
अनियमितताओं को लेकर 11 अक्टूबर 2026 को अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में अस्पताल प्रबंधन ने 14 अक्टूबर को ई-मेल के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण भेजा। प्रबंधन ने दावा किया कि अस्पताल में मरीजों का इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है और आवश्यक डॉक्टर भी उपलब्ध हैं। साथ ही गलत डायग्नोसिस और रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोपों से इनकार करते हुए सॉफ्टवेयर अपडेट को तकनीकी समस्या का कारण बताया।







