Land Fraud: राजधानी के मोवा इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर 51 लाख रुपए लेने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता सचिन सिंह सलूजा का आरोप है कि वैष्णव तांडी ने जमीन का मालिक होने का दावा करते हुए उसके साथ विक्रय इकरारनामा किया और अलग-अलग समय पर 51 लाख रुपए अग्रिम के रूप में ले लिए। बाद में जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद की जानकारी सामने आई। शिकायत की जांच के बाद पंडरी थाने में अपराध दर्ज किया गया है।
इकरारनामा कर दिए 51 लाख रुपए
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, गुढ़ियारी की साम्राज्य रेजीडेंसी में रहने वाले सचिन सिंह सलूजा ने मोवा क्षेत्र की करीब 0.405 हेक्टेयर जमीन खरीदने के लिए वैष्णव तांडी से संपर्क किया था। इसके बाद 1 जुलाई 2025 को दोनों के बीच गवाहों की मौजूदगी में नोटरीकृत विक्रय इकरारनामा किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इकरारनामा में वैष्णव ने जमीन को खुद की खरीदी हुई और विवादरहित बताया था। इस भरोसे पर सचिन ने अलग-अलग समय पर कुल 51 लाख रुपए अग्रिम राशि के तौर पर दे दिए। उनका दावा है कि भुगतान से जुड़े बैंक अभिलेख भी उनके पास मौजूद हैं।
जमीन को लेकर पहले से चल रहा था कोर्ट में मामला
रकम देने के बाद सचिन सलूजा को पता चला कि संबंधित जमीन को लेकर देशपाल रायजादा और वीरेंद्र रायजादा के बीच रायपुर न्यायालय में सिविल विवाद चल रहा है। शिकायत के अनुसार, यह मामला वर्ष 2024 से लंबित है। इसके बाद जमीन के वास्तविक मालिकाना हक को लेकर सवाल उठने लगे। सचिन का आरोप है कि जानकारी जुटाने पर उन्हें पता चला कि वैष्णव तांडी ने संबंधित जमीन स्वयं खरीदी ही नहीं थी और जमीन उनके नाम पर दर्ज भी नहीं थी। इसके बावजूद जमीन का मालिक बताकर सौदा करने और बड़ी रकम लेने का आरोप लगाया गया है।पैसे वापस मांगने पर टालमटोल का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जमीन के सौदे को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्होंने इकरारनामा संबंधी सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर आपत्तियां आमंत्रित की थीं। इसके बाद उन्होंने वैष्णव तांडी से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन आरोप है कि उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा और पैसे वापस नहीं मिले। मामले में शिकायत की जांच के बाद पंडरी पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। अब मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।







