Cyber Fraud: छत्तीसगढ़ की बसना पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना को आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी ग्रामीणों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर उनकी पासबुक, एटीएम व सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप देता था। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गिरोह का मुख्य सूत्रधार बी. लक्ष्मणा डोरा (निवासी पोलावरम, जिला पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश) लंबे समय से इस रैकेट का संचालन कर रहा था। बसना पुलिस की एक विशेष टीम ने आंध्र प्रदेश में दबिश देकर 2 अक्टूबर को उसे धर दबोचा। आरोपी के पास से पुलिस ने बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किया है।
कमीशन का लालच देकर फंसाते थे जाल में
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम मनकी के निवासी राजकुमार ताण्डी ने 20 अगस्त को बसना थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि ओडिशा निवासी सुनील दुर्गा और थिमोथी छतरिया ने गांव के लोगों को 1,500 से लेकर 20,000 रुपए तक के कमीशन का झांसा दिया था। इसके बाद ग्रामीणों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए गए। खाता खुलने के बाद आरोपियों ने 'कंपनी वेरिफिकेशन' का बहाना बनाकर ग्रामीणों से उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और रजिस्टर्ड सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लिए।
पूछताछ में खुला सरगना का नाम
शिकायत मिलते ही बसना पुलिस ने बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 318(4), 319(2) और 3(5) के तहत केस दर्ज कर छानबीन शुरू की। मामले की शुरुआती जांच में पुलिस ने सुनील दुर्गा, थिमोथी छतरिया और हेमलाल चौहान को गिरफ्तार किया था। जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो गिरोह की कड़ियां जुड़ती गईं और आंध्र प्रदेश के बी. लक्ष्मणा डोरा व चंद्राराव के नाम सामने आए।
ऑनलाइन गेमिंग और शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड में इस्तेमाल होते थे खाते
पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि इन फर्जी और किराये के बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी, अवैध शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन गेमिंग से आए करोड़ों रुपये के लेन-देन को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। फिलहाल, पुलिस पकड़े गए मुख्य आरोपी से पूछताछ कर रही है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

