Dewas liquor case: चर्चित शराब कांड में पुलिस ने शिकंजा कसते हुए एक और बड़ा कदम उठाया है। इस मामले में पुलिस ने केमिकल व्यापारी अमन कासलीवाल को गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि अमन, कांग्रेस नेता और प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के बेटे हैं। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि कोतवाली थाने में दर्ज इस गंभीर मामले की जांच के दौरान, पहले से गिरफ्तार मुख्य आरोपी अजय राठौर और उसके साथियों से पूछताछ की गई थी। इसी पूछताछ में अमन कासलीवाल का नाम सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
सिर्फ 6,000 रुपये के लिए दांव पर लगाई जिंदगियां
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी अमन ने महज 6,000 रुपये के मुनाफे के लिए शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला बेहद खतरनाक केमिकल 'मैक्स सॉल्वेंट' सप्लाई किया था। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि अमन ने यह जानलेवा केमिकल किसी वैध व्यापारी, रिटेलर या होलसेलर को देने के बजाय एक ऐसे बेरोजगार युवक को बेच दिया, जिसकी आपराधिक पृष्ठभूमि थी। बिना किसी बैकग्राउंड की जांच किए इस तरह का घातक केमिकल देना सीधे तौर पर आम लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
इसी गंभीर लापरवाही और अपराध में सीधे तौर पर सहयोग करने के चलते पुलिस ने अमन कासलीवाल को इस पूरे मामले में 'दुष्प्रेरण' (Abetment) का आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया है। फिलहाल कोतवाली पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही है और इस पूरे अवैध नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी और भी कई खुलासे हो सकते हैं और गिरफ्तारियों का दौर आगे भी जारी रह सकता है।
AI से सीखकर बनाई जा रही थी नकली शराब
इस सनसनीखेज मामले में देवास पुलिस इससे पहले भी 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासे किए, वे बेहद हैरान करने वाले थे। उन्होंने बताया कि जहरीली शराब बनाने का पूरा तरीका उन्होंने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से सीखा था। इसके बाद इंदौर से केमिकल मंगवाया गया और बाजार में खपाने के लिए कबाड़ियों से पुरानी बोतलें खरीदी गईं। इस खतरनाक नकली शराब को असली लाइसेंसी शराब के साथ मिलाकर चंदाना और बिंदाना जैसे ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किया जाता था।
इस जहरीली शराब के सेवन से कई बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद प्रशासन भी पूरी तरह एक्शन मोड में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है और उन्हें उनके पदों से हटाते हुए तबादले भी किए जा चुके हैं।







