Chhattisgarh High Court: सरकारी उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का एक और मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद सुलझता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है और 100% सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल के एक रिटायर्ड शिक्षक को 30 दिनों के भीतर ग्रेच्युटी की पूरी राशि भुगतान करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित शिक्षक को बड़ी राहत मिली है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम कोसमंदी के रहने वाले नंदकुमार वर्मा से जुड़ा है। नंदकुमार वर्मा एक पूर्णतः सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल में शिक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्हें नियमानुसार ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं मिला, तो उन्होंने कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना। मामले की सुनवाई करते हुए ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकारी ने 4 सितंबर 2023 को शिक्षक के पक्ष में 19 लाख 92 हजार 217 रुपये की ग्रेच्युटी राशि जारी करने का स्पष्ट आदेश दिया था। खास बात यह है कि राज्य सरकार या शिक्षा विभाग के किसी भी अधिकारी ने इस आदेश को किसी भी उच्च मंच या अदालत में चुनौती नहीं दी, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी फाइलें दबाकर बैठे रहे और भुगतान अटकाए रखा।
वसूली प्रमाणपत्र जारी होने के बाद भी टालमटोल
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि ग्रेच्युटी की यह बड़ी राशि निकलवाने के लिए राजस्व वसूली प्रमाणपत्र तक जारी किया जा चुका था। यहां तक कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने भी 28 जनवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से राशि जारी करने के लिए आधिकारिक पत्र भेजा था। तमाम प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई के पूरे होने के बाद भी शिक्षक को एक-एक पाई के लिए चक्कर काटने पड़े।सरकार ने दिया अधिकार क्षेत्र का तर्क
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बचाव में अजीब दलील दी गई। शासन के वकीलों ने तर्क दिया कि संबंधित स्कूल 'भुगतान एवं ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972' की धारा 1(3)(ग) के दायरे में नहीं आता है। सरकार का यह भी दावा था कि ऐसी स्थिति में प्राधिकारी के पास यह आदेश पारित करने का अधिकार ही नहीं था।
हाईकोर्ट की दो टूक: आदेश नहीं बदला, तो भुगतान रोकना गलत
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब 4 सितंबर 2023 को पारित ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकारी के आदेश को किसी भी सक्षम उच्च मंच पर चुनौती दी ही नहीं गई है, तो अधिकारियों के पास भुगतान रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। केवल प्रशासनिक हीला-हवाली या मनमाने आधार पर याचिकाकर्ता को उसके जायज हक से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को यह चेतावनी दी है कि वे आदेश की प्रति मिलते ही आगामी 30 दिनों के भीतर हर हाल में ग्रेच्युटी की पूरी राशि शिक्षक के खाते में भेजना सुनिश्चित करें।







