Bilaspur News: जिला न्यायालय की नजारत शाखा में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों का एक व्यक्ति से पैसे लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में दोनों पुलिसकर्मी तोरवा स्थित एक होटल में दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि पैसों के लेन-देन के दौरान व्यक्ति को सरकारी दस्तावेज दिखाए गए, जिनकी तस्वीरें उसने अपने मोबाइल फोन से लीं। मामले ने इसलिए गंभीरता बढ़ा दी है, क्योंकि न्यायालय से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को पैसों के बदले दस्तावेज दिखाए गए हैं, तो यह जांच का विषय है। हालांकि, वीडियो में नजर आ रही गतिविधियों के पीछे की वास्तविक वजह और लेन-देन का उद्देश्य जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
होटल में हुई बातचीत, फिर पैसों का लेन-देन
जानकारी के अनुसार, शाम करीब चार बजे दो पुलिसकर्मी एक बैग लेकर तोरवा स्थित छत्तीसगढ़ होटल पहुंचे। बैग में सरकारी दस्तावेज होने की बात कही जा रही है। कुछ देर बाद वहां एक अन्य व्यक्ति पहुंचा और दोनों पुलिसकर्मियों के साथ बातचीत करने लगा। इस दौरान चाय-नाश्ते का ऑर्डर भी दिया गया। बातचीत के बीच सादे कपड़ों में मौजूद व्यक्ति ने अपने पर्स से 500-500 रुपए के नोट निकालकर सामने बैठे पुलिसकर्मी को दिए। वीडियो में पुलिसकर्मी नोट गिनते हुए दिखाई देता है। आरोप है कि इसके बाद उसने और पैसे मांगे, जिस पर व्यक्ति ने पर्स से कुछ और रुपए निकालकर दिए।
बैग से दस्तावेज निकालकर दिखाने का आरोप
पैसों के लेन-देन के कुछ समय बाद पुलिसकर्मी ने अपने बैग से दस्तावेज निकाले और संबंधित व्यक्ति को दिखाए। इस दौरान व्यक्ति मोबाइल फोन से दस्तावेजों की तस्वीरें लेता नजर आया। बाद में पुलिसकर्मी ने दस्तावेज वापस बैग में रख लिए। बताया जा रहा है कि दोनों पुलिसकर्मी जिला न्यायालय की नजारत शाखा में पदस्थ हैं। इनमें से एक की पहचान गिरीश पाल के रूप में बताई जा रही है। हालांकि, वीडियो में दिखाई गई गतिविधियों, दस्तावेजों की प्रकृति और पैसे लेने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
न्यायालयीन दस्तावेजों की सुरक्षा पर सवाल
नजारत शाखा जिला न्यायालय की एक महत्वपूर्ण इकाई है। यहां न्यायालय के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों के रखरखाव सहित विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई जाती हैं। वारंट और नोटिस की तामीली से संबंधित कार्य भी न्यायालय की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। ऐसे में यदि न्यायालय से जुड़े दस्तावेजों को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर किसी व्यक्ति को दिखाया गया या उनकी तस्वीरें लेने दी गईं, तो यह गंभीर मामला हो सकता है। इससे दस्तावेजों की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
इस मामले में वीडियो की प्रामाणिकता, पैसों के लेन-देन की परिस्थितियों और संबंधित दस्तावेजों की प्रकृति की जांच जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दस्तावेज किस उद्देश्य से दिखाए गए और क्या इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था। संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सकेगी। फिलहाल, मामले में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है, ताकि जिम्मेदारी तय करने के साथ न्यायालयीन दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सके।







