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Ayurvedic Medicine Tender Controversy (Image Source: AI Photo)
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Chhattisgarh News: आयुर्वेदिक दवा खरीदी पर विवाद, दो सरकारी कंपनियों पर उठे सवाल

Chhattisgarh News: सरकारी अस्पतालों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के टेंडर में दो सरकारी कंपनियों के दस्तावेजों पर सवाल उठे हैं। अधिवक्ता नीलम सिंह यादव ने CGMSC के प्रबंध संचालक को कानूनी नोटिस भेजकर अनियमितताओं की जांच, धरोहर राशि जब्त करने और कंपनियों को सरकारी खरीदी से बाहर रखने की मांग की है।

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प्रकाशित: 27 Oct 2026, 12:25 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh News: सरकारी अस्पतालों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के टेंडर में दो सरकारी कंपनियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। इस मामले में अधिवक्ता नीलम सिंह यादव ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) के प्रबंध संचालक को कानूनी नोटिस भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। 
शिकायत में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (KAPL) की आठ दवाओं के उत्पादन विवरण और एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की ओर से प्रस्तुत कुछ दवाओं के नाम व निर्धारित मानकों पर आपत्ति जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। यह निविदा 22 जून 2026 को जारी की गई थी, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।

केएपीएल की आठ दवाओं के उत्पादन रिकॉर्ड पर सवाल

शिकायत के मुताबिक, केएपीएल के उत्पादन विवरण में आठ आयुर्वेदिक दवाओं के सामने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान धारवाड़ इकाई में उत्पादन नहीं होने का उल्लेख है। इनमें लवण भास्कर चूर्ण, हरीतकी चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण, त्रयोदशांग गुग्गुल, रास्नादि गुग्गुल, सप्तामृत लौह और बृहत् चतुर्भद्र चूर्ण शामिल हैं।
अधिवक्ता ने सवाल उठाया है कि यदि इन दवाओं का संबंधित अवधि में उत्पादन नहीं हुआ, तो निविदा की शर्तों के तहत तीन साल के उत्पादन और बाजार अनुभव की पात्रता कैसे पूरी की गई। इस बिंदु पर मूल रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन किए जाने की मांग की गई है।

उत्पाद अनुमति के दस्तावेजों की जांच की मांग

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि केएपीएल ने निविदा के लिए आवश्यक उत्पाद अनुमति से संबंधित पूरी सूची अपलोड नहीं की थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि दस्तावेजों की जांच के दौरान इस संबंध में आपत्ति सामने आई थी। इसके अलावा, कंपनी के तत्कालीन प्रबंध संचालक से जुड़े सीबीआई प्रकरण का हवाला देते हुए सदाचार घोषणा की भी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में एफआईआर क्रमांक RC0082026A0012 और 15 जुलाई 2026 की तारीख का उल्लेख है। इन बिंदुओं पर संबंधित एजेंसियों या अधिकारियों की आधिकारिक पुष्टि सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।

एचएलएल लाइफकेयर की दवाओं के विवरण पर भी आपत्ति

एचएलएल की बोली में 10 आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर आपत्ति जताई गई है। शिकायत के अनुसार, वासारिष्ट के स्थान पर वासाकासव और आमलकी चूर्ण के बदले सूखा फल प्रस्तुत करने जैसे अंतर सामने आए। बाजार अनुभव के सत्यापन पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में चंडीगढ़ के पीजीआइएमईआर से जुड़े सीबीआई प्रकरण का उल्लेख करते हुए 27.66 लाख रुपए के भुगतान और 17 मामलों में बिलों में बदलाव कर दोहरा भुगतान लेने के आरोपों का जिक्र है। एम्स भोपाल में कैंसर की एक दवा 400 रुपए के बजाय 2,100 रुपए में देने और आपात खरीदी 15 लाख से बढ़ाकर 60 करोड़ रुपए करने के दावे भी किए गए हैं।

15 दिन में कार्रवाई शुरू करने की मांग

अधिवक्ता नीलम सिंह यादव ने सीजीएमएससी के अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। नोटिस में 15 दिन के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं होने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका और केंद्रीय सतर्कता आयोग, लोकायुक्त तथा प्रवर्तन निदेशालय में शिकायत करने की चेतावनी दी गई है।
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