छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन छत्तीसगढ़ उपकार संशोधन विधेयक 2026 को सदन में पारित कर दिया गया। इस संशोधन के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाला 12 प्रतिशत उपकार (सेस) पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
तीन करोड़ जनता को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार के इस फैसले से प्रदेश की लगभग तीन करोड़ जनता को सीधा फायदा होगा। रजिस्ट्री प्रक्रिया में लगने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ हटने से अब आम लोगों को संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने में राहत मिलेगी। शासन के अनुसार, इस निर्णय से हर वर्ष करीब 147 से 150 करोड़ रुपये तक की बचत सीधे जनता के पास रहेगी।
गौरतलब है कि यह 12% उपकार पूर्व में राजीव गांधी युवा मितान क्लब योजना के संचालन के लिए लगाया गया था। वर्तमान सरकार ने समीक्षा के बाद इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिससे स्टांप शुल्क के अतिरिक्त लगने वाला भार खत्म हो गया है।
सदन में गूंजे सवाल, हुई तीखी बहस
विधेयक पर चर्चा के दौरान अजय चंद्राकर ने पूर्व कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस योजना के लिए यह उपकार लगाया गया, उसका न तो सही पंजीयन हुआ और न ही नियमित ऑडिट कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 52 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई, लेकिन उसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता नहीं रही। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों से राशि की वसूली की मांग भी रखी।
आखिरकार विधेयक हुआ पारित
सदन में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अंततः छत्तीसगढ़ उपकार संशोधन विधेयक 2026 बहुमत से पारित कर दिया गया। इसके साथ ही रजिस्ट्री पर लगने वाला अतिरिक्त उपकार समाप्त हो गया है।
इस निर्णय से न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। संपत्ति खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में अधिक सुलभ और किफायती हो जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह फैसला जनहित, पारदर्शिता और आर्थिक राहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे आम जनता को सीधे लाभ के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
