जिले के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक सुपेला थाना क्षेत्र के चंद्रा मौर्य चौक पर रविवार दोपहर एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक बेहद तेज रफ़्तार कार ने रेड सिग्नल पर शांति से हरी बत्ती का इंतज़ार कर रहे दोपहिया वाहनों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में दो मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं, जबकि एक युवक जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रहा है।
कई फीट तक घिसटते चले गए लोग
यह दर्दनाक हादसा 17 मई की दोपहर करीब 2:38 बजे का है। चश्मदीदों के मुताबिक, एक काले रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार (CG-07-BR-0571) दुर्ग से रायपुर की ओर बेहद आक्रामक रफ़्तार में जा रही थी। चंद्रा मौर्य चौक पर रेड सिग्नल होने के बावजूद कार चालक ने ब्रेक लगाने के बजाय रफ़्तार और बढ़ा दी।
भीषण टक्कर: कार ने सिग्नल पर खड़ी स्कूटी और बाइक को पीछे से इतनी जोर से टक्कर मारी कि गाड़ियाँ पूरी तरह चकनाचूर हो गईं।
सड़क पर पसरा मातम: टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोपहिया वाहनों पर सवार लोग हवा में उछलकर कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे और घिसटते चले गए।
चिट्टा तस्कर और नशेड़ी निकला आरोपी
इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कार चालक सागर जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। मेडिकल जांच और पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:
नशे की हालत में था चालक: दुर्घटना के वक्त आरोपी सागर पूरी तरह नशे में धुत्त था और होश खो बैठा था।
पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड: आरोपी कोई आम नागरिक नहीं बल्कि नशे के काले कारोबार से जुड़ा पुराना अपराधी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसे पहले भी 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग्स) के साथ वैशाली नगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया जा चुका है।
NDPS एक्ट के तहत मामले: इसके अलावा, उसके खिलाफ मोहन नगर थाना में पहले से ही अपराध क्रमांक 460/2025 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के अंतर्गत संगीन मामला दर्ज है।
उजड़ गए दो परिवार, छुट्टियां बनीं काल
1. नूर खान (16 वर्ष) - साक्षरता चौक, सुपेला
नूर खान गर्मी की छुट्टियों का सदुपयोग करने के लिए पिछले 4-5 दिनों से अपने मौसा सलीम अली के साथ एसी (AC) रिपेयरिंग का काम सीख रहा था। रविवार को भी वह बड़े चाव से काम पर निकला था, लेकिन क्या मालूम था कि यह उसका आखिरी सफर होगा। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
2. मनोहर कुमार गोनाडे
इस हादसे में मनोहर कुमार ने भी अपनी जान गंवा दी। उनकी असमय मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
एक तरफ बेटी का जन्म, दूसरी तरफ जिंदगी की जंग
हादसे में गंभीर रूप से घायल सलीम अली की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है और वे एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं। सलीम के परिवार पर इस वक्त दुखों का दोहरा पहाड़ टूटा है:
खुशी के बाद मातम: हादसे से ठीक एक दिन पहले ही सलीम के घर एक नन्ही बेटी ने जन्म लिया था। उनकी पत्नी अभी अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में भर्ती ही थीं कि तभी पति के इस गंभीर हादसे की खबर आ गई।
मदद की गुहार: सलीम का परिवार बेहद गरीब है और इलाज का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ है। रिश्तेदार लगातार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई सहायता राशि या ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया है। डॉक्टरों के मुताबिक सलीम अभी भी खतरे से बाहर नहीं हैं।
'गैर इरादतन हत्या' का मामला दर्ज
आरोपी के खिलाफ नए कानून (BNS) और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS): धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), धारा 125(ए) (जान जोखिम में डालना), धारा 128।
मोटर व्हीकल एक्ट: धारा 184 (खतरनाक तरीके से वाहन चलाना)।
ट्रैफिक पुलिस पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद भिलाई-दुर्ग की ट्रैफिक व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश है:
भगवान भरोसे चौक: शहर के सबसे प्रमुख और व्यस्ततम चंद्रा-मौर्या चौक पर कभी भी ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात नहीं रहते। इस पूरे चौक को सिर्फ ऑटोमैटिक सिग्नल के भरोसे छोड़ दिया गया है।
वसूली का आरोप: स्थानीय निवासियों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस का ध्यान चौक-चौराहों पर नियमों का पालन कराने या सुरक्षा देने पर नहीं, बल्कि छिपे हुए पॉइंट्स पर खड़े होकर चालान काटने और वसूली करने पर रहता है।
भारी वाहनों का आतंक: सुपेला और आसपास के क्षेत्रों में शाम ढलते ही डंपर और हाइवा जैसे भारी वाहन बेखौफ और प्रतिबंधित समय में भी दौड़ते नजर आते हैं, जिन पर ट्रैफिक पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। इसी ढर्रे का खामियाजा आज दो मासूमों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा है।

